राजा मेदिनीराय के किले का जीर्णोद्धार करने की जरूरत

लातेहार : वरीय अधिवक्ता सह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, लातेहार के संघ चालक राजमणि प्रसाद ने कहा कि राजा मेदिनीराय के किले का जीर्णोद्धार करने की आवश्यकता है. यह एक ऐतिहासिक धरोहर है. श्री प्रसाद मकर संक्रांति के अवसर पर सदर प्रखंड की नावागढ़ पंचायत स्थित राजा मेदिनीराय के किला परिसर में आयोजित मेला को […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 16, 2017 8:58 AM

लातेहार : वरीय अधिवक्ता सह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, लातेहार के संघ चालक राजमणि प्रसाद ने कहा कि राजा मेदिनीराय के किले का जीर्णोद्धार करने की आवश्यकता है. यह एक ऐतिहासिक धरोहर है. श्री प्रसाद मकर संक्रांति के अवसर पर सदर प्रखंड की नावागढ़ पंचायत स्थित राजा मेदिनीराय के किला परिसर में आयोजित मेला को संबोधित कर रहे थे. इससे पहले श्री प्रसाद, समाजसेवी सरयू प्रसाद सिंह, योग शिक्षक बलिराम सिंह, सांसद प्रतिनिधि मुकेश कुमार पांडेय व विकास भारती के धनंजय कुमार ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी श्री सिंह ने कहा कि राजा मेदिनीराय प्रजा के बीच काफी लोकप्रिय थे और प्रजा के हर दुख सुख में उनके साथ रहते थे. वहीं सांसद प्रतिनिधि ने कहा कि चतरा सांसद सुनील सिंह इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करने के लिए कटिबद्ध हैं और उनका प्रयास है कि इसे विकसित किया जाये. इसके लिए विशेषज्ञों से परामर्श ली जा रही है. माले नेता गोपाल प्रसाद ने कहा कि राजा मेदिनीराय के काल में दूध दही की नदियां बहती थीं. जिस प्रजा के घर में दूध दही नहीं होता था, उसके घर में राजा गाय व भैंस का इंतजाम कराते थे. उनके इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की दरकार है. मजदूर नेता श्रवण पासवान ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीणों को क्षेत्र की ऐतिहासिक जानकारी मिलती है. यह सराहनीय कदम है.

मंच का संचालन करते हुए राजा मेदिनी किला जीर्णोद्धार समिति के राम अवतार चौधरी ने कहा कि समिति द्वारा इस धरोहर के संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है, इसके लिए सामुहिक भागीदारी की आवश्यकता है. उन्होंने चतरा सांसद एवं लातेहार जिला के दोनों विधायकों से इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया. मौके पर गोपाल सिंह चेरा, बालकिशोर सिंह, मनोज सिंह, विनय सिंह, भागवत सिंह, लीलेश्वर सिंह, धमेंद्र सिंह, फुलेश्वर साव, रामदीपक सिंह, राजेंद्र सिंह, पीतांबर सिंह, हरेंद्र सिंह, श्रवण सिंह, सुरेश सिंह, शिवचरण, आशा देवी आदि उपस्थित थे. मेला में ग्रामीणों के लिए दही-चूड़ा की व्यवस्था की गयी थी.