शांति किंडो को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
लातेहार: अपनी पूरी युवा अवस्था बाल श्रम एवं मानव तस्करी के खिलाफ खपा देनेवाली लातेहार जिला की बेटी और बाल श्रम आयोग की अध्यक्ष शांति किंडो ने एक बार फिर लातेहार जिला का नाम रोशन किया है. उनकी 25 वर्षों की इस तपस्या को मुकाम मिला है. गत 22 जुलाई को दिल्ली के राजेंद्र भवन […]
लातेहार: अपनी पूरी युवा अवस्था बाल श्रम एवं मानव तस्करी के खिलाफ खपा देनेवाली लातेहार जिला की बेटी और बाल श्रम आयोग की अध्यक्ष शांति किंडो ने एक बार फिर लातेहार जिला का नाम रोशन किया है. उनकी 25 वर्षों की इस तपस्या को मुकाम मिला है. गत 22 जुलाई को दिल्ली के राजेंद्र भवन में नंदिनी फाउंडेशन ने इन्हें नंदिनी एचिवर राष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा है. पुरस्कार ग्रहण करने के बाद लातेहार पहुंची सुश्री शांति किंडो ने प्रभात खबर से बातचीत में बताया कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत देश के अलग-अलग राज्यों से कुल आठ महिलाओं को फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया है.
इसमें झारखंड से उनका नाम भी शामिल है. उन्होंने कहा कि पुरस्कार मिलने से उनकी काफी हौसला अफजाई हुई है लेकिन यही उनकी आखरी मंजिल नहीं है. ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के साथ-साथ बाल श्रम व मानव तस्करी के खिलाफ उनकी यह जंग अनवरत जारी रहेगी. उन्होंने इस पुरस्कार को अपने शुभचिंतकों एवं अपने परिजनों को समर्पित करते हुए कहा कि लातेहार जिला के खास महुआडांड़-गारू क्षेत्र से प्रति वर्ष सैकड़ों नाबालिग युवक-युवतियों को बहला-फुसला कर महानगरों में ले जाया जाता है. उन्होंने अब तक 54 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है. उन्होंने कहा कि मानव तस्करी बाल श्रम जैसे अभिशाप को रोकने के लिए क्षेत्र में विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारना आवश्यक है.
यहां के जनजातिय समुदाय के लोगों की जीवन शैली का अध्ययन करने के लिए सुदूरवर्ती क्षेत्रों का दौरा किया और उनके नजदीक रह कर समय गुजारा. उन्हें काफी नजदीक से देखने का उन्हें अवसर प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि इस कार्य में लातेहार जिला के तत्कालीन उपायुक्त मस्तराम मीणा, कमल किशोर सोन, मनीष रंजन एवं राहुल कुमार पुरवार का अपूर्व सहयोग मिला. उनके सहयोग एवं मागदर्शन के कारण वह आज इस मुकाम तक पहुंची है. पुरस्कार मिलने के बाद वह दुगने उत्साह से अपना कार्य करेंगी.
