छतरपुर : बटाने जलाशय परियोजना से विस्थापित लोगों को उनका हक़ मिले और किसानों को इस योजना का अपेक्षित लाभ मिले, इसके लिए सक्रियता से काम व जो गतिरोध आ रहे हैं, उसे दूर करने का प्रयास होना चाहिए.
ये बातें औरंगाबाद सांसद सुशील कुमार सिंह ने विस्थापितों की समस्यायों को लेकर पुनर्वास स्थल मांडर में आयोजित एक सभा में कही. विस्थापितों ने बताया कि बटाने जलाशय के लिए 16 गांवों के करीब 700 एकड़ रैयती मान्यता प्राप्त गैरमजरूआ मालिक भूमि की मुआवजा भुगतान को लेक 35 वर्षों से लंबित है. नावाडीह गांव में विस्थापितों के पुनर्वास के लिए भूमि अर्जित की गयी है. इनमें में 44 विस्थापितों को परचा मिला है, लेकिन अब तक उन्हें भौतिक दखल कब्ज़ा नहीं दिलाया गया. कुछ रैयतों को अर्जित की गयी भूमि का मुआवजा भी नहीं मिला. वहीं मांडर गांव में 48 अनुसूचित जनजाति व दलित परिवारों को वन विभाग की भूमि में पुनर्वासित किया गया है.
इस कारण इन परिवारों का आवासीय व जाति प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है. ये परिवार सरकार द्वारा चलायी जा रही कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हो जा रहे हैं. परिवार के मुखिया, विकलांग, विधवा व परित्यक्ता का नाम विस्थापित सूचि में दर्ज करने, एनएच 98 बटाने मोड़ से पोखराहा मोड़ तक सड़क व पुल निर्माण कराने, रामगढ व मसिहानी पुनर्वास स्थल का म्युटेशन कराने व बुनियादी सुविधा बहाल करने, विशेष भूअर्जन कार्यालय औरंगबाद में जमा राशि प्राप्त न होने, विस्थापितों को नौकरी नहीं दिए जाने सहित विभिन्न मुद्दे बैठक में उजागर हुए. बताया गया कि इसी कारण से नाराज विस्थापितों ने बटाने डैम का गेट उठा कर जाम कर दिया है. विधायक किशोर ने विस्थापितों को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ हैं और विस्थापितों के समस्यायों का अविलंब निदान किया जायेगा.
उन्होंने मौजूद पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. बैठक में एसडीओ राजेश प्रजापति, भू-अर्जन पदाधिकारी बंका राम, पुनर्वास पदाधिकारी सुजीत भगत, सीओ विजय हेमराज, हीरा कुमार, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता व कार्यपालक अभियंता, समन्वय समिति सदस्य अजय कुमार सिंह, जगदीश यादव, इंदल सिंह, अनिल सिंह पटेल मुखिया राजेंद्र यादव सहित संबंधित पंचायतों के जन प्रतिनिधि व सैकड़ों विस्थापित मौजूद थे.
