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अंधविश्वास की जड़ें गहरी हैं नौडीहा इलाके में

छतरपुर (पलामू) : नौडीहा इलाके में अंधविश्वास की जड़ें गहरी हैं. जन्माष्टमी के दिन से जबसे भूत मेला शुरू हुआ था. लोगों की भीड़ उमड़ रही थी. लोगों में यह धारणा बैठ गयी थी, जो बीमारी डॉक्टर व वैद्य ठीक नहीं कर पा रहे हैं, वह ओझा रमेश भुइयां द्वारा झांड़-फूंक कर ठीक कर दिया […]

छतरपुर (पलामू) : नौडीहा इलाके में अंधविश्वास की जड़ें गहरी हैं. जन्माष्टमी के दिन से जबसे भूत मेला शुरू हुआ था. लोगों की भीड़ उमड़ रही थी. लोगों में यह धारणा बैठ गयी थी, जो बीमारी डॉक्टर व वैद्य ठीक नहीं कर पा रहे हैं, वह ओझा रमेश भुइयां द्वारा झांड़-फूंक कर ठीक कर दिया जा रहा है.
दूर-दराज से लोग पहुंचने लगे थे. जहां पर मेला लगा था, वहां काफी भीड़ जुटती थी. दुकानें भी सज गयी थी. न सिर्फ झारखंड, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार, छत्तीसगढ, उत्तरप्रदेश से भी लोग आ रहे थे. लोगों की मानें तो सुबह चार बजे से ही झांड-फूंक शुरू हो जाता था. रमेश भुइयां पहले दिल्ली में काम करता था. कहा जाता है कि उसे एक दिन स्वप्न आया कि करकटा के झरीवा नदी में देवी मां अवतरित हुई है. उसी के शक्ति से लोगों का इलाज करो.
फिर क्या था. रमेश ने एक दिन आकर लोगों को बताया और उसके बाद झांड-फूंक का सिलसिला शुरू हो गया. प्रशासन ने भी इसे हल्के से लिया. इधर अंधविश्वास अपना पांव तेजी से पसारने लगी, जब पानी से सिर से ऊपर हो गया तब स्थानीय प्रशासन की नींद खुली. कार्रवाई के लिए पुलिस ने ऐसा वक्त निकाला, जब अंधविश्वास चरम पर था. लोग ओझा की भक्ति में डूबे थे, उसी दौरान पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
लोगों का कहना है कि यदि सुबह का वक्त होता, तो ऐसी स्थिति नहीं होती. बुधवार की घटना के बाद इलाके में लोग उग्र हैं. जो लोग अंधविश्वास से जकड़े हुए हैं, उन्हें पुलिस की कार्रवाई गलत लग रही है. गोली चालन में घायल अनिल का कहना था कि ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसके कारण कार्रवाई हो. ओझा जी तो लोगों का मुफ्त में इलाज कर रहे थे. जो रोग डाक्टर के पास से ठीक नहीं होता था, उसे ओझा जी ठीक करते थे. ऐसा मानने वाला सिर्फ अनिल ही नहीं, बल्कि कई लोग हैं. सरईडीह पुलिस पिकेट को लोगों ने घेरा था.
लोगों की मांग थी कि ओझा को मुक्त किया जाये. बहरहाल चाहे जो भी हो, लेकिन जिस तरह एक ओझा के प्रति भक्ति लोगों ने दिखायी, उससे यह पता चल रहा है कि आज भी इस इलाके में अंधविश्वास की जड़ें गहरी है. कंप्यूटर इंटरनेट के दौर में भी अंधविश्वास का आलम है. तो इसे क्या कहा जाये. बुधवार की घटना के बाद गांव में लोग काफी आक्रोश में दिखे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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