भगवान भरोसे कंचनपुर की खेती
भगवान भरोसे कंचनपुर की खेतीशिवनाला सिंचाई योजना से सटे गांव में भी सूखा हाल रंका प्रखंड के कंचनपुर गांव का12जीडब्लूपीएच3-धान की फसल इस तरह मुरझा चुकी है12जीडब्लूपीएच4-अपनी व्यथा सुनाते किसान जनेश्वर तिवारी12जीडब्लूपीएच2-अपने सूखे धान को दिखाते जनेश्वर तिवारीनंद कुमार, रंका (गढ़वा)गढ़वा के रंका प्रखंड स्थित कंचनपुर गांव के किसानों की खेती भगवान भरोसे है. यह […]
भगवान भरोसे कंचनपुर की खेतीशिवनाला सिंचाई योजना से सटे गांव में भी सूखा हाल रंका प्रखंड के कंचनपुर गांव का12जीडब्लूपीएच3-धान की फसल इस तरह मुरझा चुकी है12जीडब्लूपीएच4-अपनी व्यथा सुनाते किसान जनेश्वर तिवारी12जीडब्लूपीएच2-अपने सूखे धान को दिखाते जनेश्वर तिवारीनंद कुमार, रंका (गढ़वा)गढ़वा के रंका प्रखंड स्थित कंचनपुर गांव के किसानों की खेती भगवान भरोसे है. यह गांव फिर सूखे की चपेट में है. अनुमंडल मुख्यालय से सटे इस गांव की अधिसंख्य आबादी खेती पर निर्भर है. यहां मुख्य रूप से धान की खेती होती है. पूरी खेती मॉनसून पर अाश्रित है. इस वर्ष अगस्त में औसत 326 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से कम है. सितंबर में बिलकुल ही बारिश नहीं हुई. इसके कारण फसलों पर विपरीत असर पड़ा है. कंचनपुर गांव शिवनाला सिंचाई योजना के कमांड एरिया में आता है. शिवनाला की नहर का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया है. नहर मिट्टी से बंद हाे जाने के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. पर्याप्त बारिश के अभाव में गांव में स्थित आहर में भी पानी नहीं है. कुछ किसानों ने डीजल पंप से पानी पटाकर धान की फसल को बचाने का प्रयास किया है, लेकिन इसमें उनकी काफी पूंजी लग जा रही है.कर्ज लेकर की थी खेती, सूख रहा जनेश्वर का खेत कंचनपुर निवासी जनेश्वर तिवारी जुलाई में हुई बारिश से काफी उत्साहित थे. उन्होंने 40 हजार रुपये कर्ज लेकर चार एकड़ में धान की खेती की थी. इसके बाद अगस्त एवं सितंबर में कम बारिश के कारण खेत में ही फसल सूखने लगी. उन्होंने किसी प्रकार निजी व्यवस्था कर धान को बचाने का प्रयास किया, लेकिन बार-बार डीजल पंप से धान पटाना संभव नहीं हुआ. अबतक उनकी आधी फसल सूख चुकी है. अगर इसी तरह आगे भी वर्षा नहीं हुई, तो शेष धान को भी बचाना संभव नहीं है. आसपास में सिंचाई का भी कोई साधन नहीं है. शिवनाला बांध भी रख-रखाव के अभाव में मिट्टी से भर गया है. विधायक व सांसद भी किसानों की स्थिति से बेखबर हैं. तीन साल से किसानों को फसल बीमा की राशि का भुगतान नहीं हुआ है. स्थिति यह है कि सरकार या बैंक भी उनको कर्ज या सहायता देने में रुचि नहीं दिखाते़