पेट भरने के लिए चकवड़ काट रहे हैं ग्रामीण
पेट भरने के लिए चकवड़ काट रहे हैं ग्रामीण 1जीडब्ल्यूपीएच8-बच्चों व महिलाओं के साथ चकवड़ काटते लोगप्रतिनिधि, धुरकी(गढ़वा). धुरकी प्रखंड में विगत तीन वर्ष से कम बारिश होने के कारण सुखाड़ की स्थिति बनी थी. इस बार उससे भी भयानक सुखाड़ की स्थिति बन चुकी है. गरीबों के घर में अनाज नहीं है. उन्हें अपना […]
पेट भरने के लिए चकवड़ काट रहे हैं ग्रामीण 1जीडब्ल्यूपीएच8-बच्चों व महिलाओं के साथ चकवड़ काटते लोगप्रतिनिधि, धुरकी(गढ़वा). धुरकी प्रखंड में विगत तीन वर्ष से कम बारिश होने के कारण सुखाड़ की स्थिति बनी थी. इस बार उससे भी भयानक सुखाड़ की स्थिति बन चुकी है. गरीबों के घर में अनाज नहीं है. उन्हें अपना पेट भरना एक चुनौती बन चुकी है. खासकर गांव के युवा कमाने के लिये बाहर पलायन कर रहे हैैं, वहीं घर में रहनेवाले बच्चे व वृद्ध को अपने पेट के लिए सोचना पड़ रहा है. मजबूरी में स्कूली बच्चे भी घर के परिजनों के साथ रोटी रोजी की जुगाड़ में लगे हैं. खाला गांव के देवकरण बैठा( 70 वर्ष ) जो प्रखंड कार्यालय के चहारदीवारी के पास चकवड़ काट रहे थे, से पूछने पर उन्होंने बताया कि मजबूरी है कि उम्र अधिक हो जाने के कारण मैं मजदूरी नहीं कर सकता. अब तो अपना पेट भरने के लिए कोई काम करना है. घर में 14 परिवार हैं. खेती नहीं हुआ है. कुछ नहीं करेंगे तो पेट कैसे चलेगा. अभी चुनाव है. प्रतिनिधि आ रहे हैं, लेकिन पेट की आग बुझाने की चिंता किसी को नहीं है.