धर्म के बिना सम्यक ज्ञान की कल्पना नहीं : किशोर

धर्म के बिना सम्यक ज्ञान की कल्पना नहीं : किशोर मेदिनीनगर. सतारूढ़ दल के मुख्य सचेतक सह छतरपुर विधायक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि धर्म के बिना न तो सम्यक ज्ञान की कल्पना की जा सकती है और न ही सम्यक चरित्र की. सम्यक ज्ञान व सम्यक चरित्र के लिए धर्म की आवश्यकता होती है. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 27, 2015 7:39 PM

धर्म के बिना सम्यक ज्ञान की कल्पना नहीं : किशोर मेदिनीनगर. सतारूढ़ दल के मुख्य सचेतक सह छतरपुर विधायक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि धर्म के बिना न तो सम्यक ज्ञान की कल्पना की जा सकती है और न ही सम्यक चरित्र की. सम्यक ज्ञान व सम्यक चरित्र के लिए धर्म की आवश्यकता होती है. वे शुक्रवार को रांची रोड रेड़मा स्थित ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के आठवें अधिवेशन में बोल रहे थे. विधायक श्री किशोर ने कहा कि धर्म का मतलब जो धारण करने योग्य हो, जिससे जीवन का उद्धार हो सके. धर्म के बिना न तो सत्य को पहचाना जा सकता है और न ही सत्य व असत्य में अंतर ही समझा जा सकता है. जीवन के सर्वांगीण विकास व कल्याण के लिए धर्म की जरूरत है. उन्होंने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में जो विसंगतियां आयी हैं, उसका मूल कारण राजनीति से धर्म का अलग होना है. धर्म से जुड़े लोग जब राजनीति में सक्रिय होंगे, तो निश्चित रूप से राजनीति स्वच्छ व स्वस्थ होगी. इससे पहले आयोजन समिति के लोगों ने विधायक श्री किशोर का स्वागत किया. मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज सिंह, सांसद प्रतिनिधि मंगल सिंह, भाजपा जिला महामंत्री विजय ओझा, दिलीप तिवारी, आयोजन समिति के संरक्षक विजय तिवारी, अध्यक्ष अजय तिवारी सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.जीवन की व्यथा दूर करती है भागवत कथा : शास्त्री नैमीषारण्य से पधारे विद्वान आनंदभाई शास्त्री ने भागवत कथा की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला. कहा कि मानव जीवन की व्यथा को दूर करने के लिए भागवत कथा का परायण व श्रवण जरूरी है. इस सदग्रंथ के स्वाध्याय एवं श्रवण से जीवन के समस्त दुख दूर होते हैं और लौकिक व पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है. भागवत कथा परम सुख की रसखान है. भागवत कथा जीवन के कल्याण के लिए सत्य का मार्ग प्रशस्त करती है. इसके आधार पर चलने से ही मानव जीवन का उद्धार होता है.