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शांति चाहती है शौचालय पर अब तक नहीं मिला

70 वर्ष की उम्र में एक शौचालय के लिए दर-दर घूम रही है शांति. संस्था वाले कहते हैं बालू लाअो, बनवा देंगे. अब इस उम्र में वह कहां से बालू लायेगी. कोई जवाब देनेवाला भी नहीं है. अब वह कहां से शौचालय बनायेगी. मेदिनीनगर : शांति कुंवर की उम्र करीब 70 साल है. वह चाहती […]

70 वर्ष की उम्र में एक शौचालय के लिए दर-दर घूम रही है शांति. संस्था वाले कहते हैं बालू लाअो, बनवा देंगे. अब इस उम्र में वह कहां से बालू लायेगी. कोई जवाब देनेवाला भी नहीं है. अब वह कहां से शौचालय बनायेगी.
मेदिनीनगर : शांति कुंवर की उम्र करीब 70 साल है. वह चाहती है कि उसके घर में शौचालय का निर्माण हो जाये, ताकि उसकी परेशानी दूर हो सके. शांति का कहना है कि इस उम्र में अब वह बाहर नहीं जा सकती. यदि घर में शौचालय हो जाता, तो सहूलियत होती. इसके लिए परेशान है. लेकिन उसकी परेशानी कम नहीं हो रही है. यह बताया गया कि पडवा प्रखंड में स्वयंसेवी संस्था द्वारा संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है.
शौचालय निर्माण की मांग को लेकर जब शांति मुखिया के पास गयी, तो उसे यह कहा गया कि संस्था के लोगों से मिल लो, शौचालय का निर्माण हो जायेगा. शांति कुंवर शुक्रवार को पडवा प्रखंड कार्यालय आयी थी. उसने बताया कि जब वह संस्था वाले के पास गयी, तो संस्था के लोगों ने यह कहा कि घर में बालू का इंतजाम कर रखना. उसके बाद शौचालय बनेगा.
शांति कहती है कि अब इस उम्र में अब वह बालू से कहां से इंतजाम करे. वह आज अपनी पीड़ी लेकर बीडीओ से मिलने आयी थी, लेकिन उससे मुलाकात नहीं हुई. शांति कुंवर परेशान हैं, लेकिन उसे कोई मदद करने वाला नहीं है. यह हाल तब है कि जब संपूर्ण स्वच्छता अभियान पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इलाका खुले शौच से मुक्त हो, इसके लिए अभियान चल रहा है, लेकिन एक वृद्ध महिला चाहती है कि उसके घर शौचालय बने, लेकिन उसे शौचालय नहीं मिल रहा है.
सुलगता सवाल
संपूर्ण स्वच्छता अभियान में प्रावधान यह है कि स्वयंसेवी संस्था से काम नहीं लिया जाये, लाभुक खुद शौचालय का निर्माण करें. स्पष्ट प्रावधान के बाद भी पडवा प्रखंड में एनजीओ से काम लिया जा रहा है, ऐसा किस परिस्थिति में हुआ है, यह भी एक सुलगता सवाल है. क्योंकि शांति के बयान से यह स्पष्ट हो रहा है कि एनजीओ शौचालय का निर्माण करा रहे हैं.
6300 शौचालय िनर्माण का लक्ष्य
संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत पलामू के तीन प्रखंडों को जून माह तक खुले शौच से मुक्त करना है. जिन प्रखंडों को खुले शौच से मुक्त करना है, उसमें सतबरवा, पडवा और मनातू शामिल है. जून तक इन इलाकों को खुले शौच से मुक्त प्रखंड बनाना है. वहीं पडवा प्रखंड में 6300 शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता शशिशेखर सिंह ने कहा कि यह सही है कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान में यह प्रावधान है कि एनजीओ से काम नहीं लिया जाये. लाभुक ही शौचालय का निर्माण कराये. वैसे लाभुक जो मुखिया को लिखित रूप से यह देते हैं कि वह शौचालय का निर्माण कराने में सक्षम नहीं है, तब मुखिया द्वारा प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है. उसके बाद एनजीओ से कार्य कराया जाता है, ताकि लक्ष्य पूरा हो सके.
Prabhat Khabar Digital Desk
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