समर्पण करें या गोली खायें

मेदिनीनगर : सोमवार को मेदिनीनगर में राज्य के डीजीपी डीके पांडेय ने उग्रवाद व अपराध की समीक्षा बैठक की.कोयल भवन में आयोजित बैठक में डीजीपी ने विकास कार्यों में कोई गतिरोध न हो, इसके लिए जहां सुरक्षा का बेहतर वातावरण तैयार करने के प्रति पुलिस की वचनबद्धता दोहरायी. वहीं स्पष्ट किया कि राज्य में उग्रवाद […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 17, 2017 8:43 AM

मेदिनीनगर : सोमवार को मेदिनीनगर में राज्य के डीजीपी डीके पांडेय ने उग्रवाद व अपराध की समीक्षा बैठक की.कोयल भवन में आयोजित बैठक में डीजीपी ने विकास कार्यों में कोई गतिरोध न हो, इसके लिए जहां सुरक्षा का बेहतर वातावरण तैयार करने के प्रति पुलिस की वचनबद्धता दोहरायी.

वहीं स्पष्ट किया कि राज्य में उग्रवाद उन्मूलन के दिशा में पुलिस सक्रियता के साथ काम कर रही है. तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाये तो पूर्व की तुलना में नक्सली काफी कमजोर हो चुके है. उनके सामने सिवाय आत्मसमर्पण के कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीजीपी ने कहा कि झारखंड पुलिस का मुख्य फोकस राज्य से लगे बिहार व छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में मिल रही चुनौतियों को दूर करने का है.

इस पर फोकस कर पुलिस पूरी सक्रियता के साथ लगी है. इसमें काफी हद तक घुसपैठ पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी. डीजीपी ने कहा कि अभी के जो हालात है, वह पूरी तरह से राज्य पुलिस का नियंत्रण हो चला है. अब नक्सलियों के पास समर्पण ही आखिरी विकल्प बचा है, या तो वे हथियार डाल कर मुख्य धारा से जुड़े, नहीं तो मरने के लिए तैयार हो जायें.

बताया कि पूर्व में विकास कार्यों में कुछ बाधाओं के कारण प्रगति पर असर देखने को मिला था. लेकिन अब सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सुरक्षाबलों को तैनात कर सुरक्षा के माहौल में विकास कार्यों को पूरा किया जा रहा है. इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहा है.पलामू की चर्चा करते हुए डीजीपी ने कहा कि मनातू एक्शन प्लान व लातेहार जिले में सरयू एक्शन प्लान के तहत जो कार्य हुआ है वह तो उदाहरण है. ऐसे कई उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में काम चल रहा है. अब नक्सली इस स्थिति में नहीं कि कार्य में बाधा डाल सके.

डीजीपी ने कहा कि जहां तक बूढ़ा पहाड़ का सवाल है, तो उस पहाड़ को उग्रवादियों से परी तरह से मुक्त करने के लिए सुरक्षा बलों का कारगर अॉपरेशन जारी है. क्षेत्र से उग्रवादियों को खदेड़ने की कार्य योजना पर काम किया जा

रहा है.

डीजीपी श्री पांडेय ने कहा कि क्षेत्र में कितने नक्सली सक्रिय है, इसके आंकड़े पर वह चर्चा नहीं करेंगे. लेकिन इतना जरूर है कि जितने भी नक्सली सक्रिय हैं, उनसे निबटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद है. बैठक में पलामू में चल रहे विकास योजनाओं पर चर्चा की गयी. कहा गया कि यदि कहीं भी सुरक्षा का आवश्यकता है, तो वैसे स्थलों की सूची सौंपी जाये, ताकि सुरक्षा के मुकम्मल इंतजाम किया जा सके.

बैठक में एसटीएफ के आइजी रविकांत धान, पलामू के डीआइजी विपुल कुमार शुक्ला, पलामू उपायुक्त अमीत कुमार, एसपी इंद्रजीत महथा, गढ़वा एसपी आलोक कुमार, एसटीएफ के एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा, सीआरपीएफ के कमांडेंट एसके लिंडा सहित कई लोग मौजूद थे.

एअ 10 वर्षों की कार्य योजना तैयार करें

2025 से लेकर 2030 तक सुरक्षा के दृष्टिकोण से जो आवश्यकता होगी, उसके लिए पुलिस पिकेट, थाना के निर्माण की जो जरूरत होगी, उसे लेकर कार्य योजना अभी से ही तैयार की जा रही है. सोमवार को डीजीपी डीके पांडेय ने समीक्षा बैठक में इस बात का जिक्र किया.

बताया गया कि पुलिस के स्तर से इसका आकलन किया जा रहा है कि 2025 में पुलिस को क्या-क्या जरूरत होगी. आबादी के हिसाब से कितने नये थाने, पिकेट की स्थापना की जरूरत होगी इसकी भी सूची तैयारी की जाएगी. जरूरत के हिसाब से भूमि उपलब्ध हो, इसके लिए भी उपायुक्त से भूमि को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि उस वक्त जरूरत के हिसाब से पुलिसिंग को बेहतर किया जा सके. बैठक में कहा गया कि पुलिस वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की भी कार्य योजना तैयार कर रही है, ताकि सुरक्षा का बेहतर माहौल कायम रहे. आज की जरूरत के हिसाब से पुलिसिंग हो रही है, लेकिन आठ वर्ष के बाद क्या जरूरत होगी, उसका भी आकलन शुरू कर दिया गया है.

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