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अधिकारी पर 30 हजार का जुर्माना

न्याय. नक्शा के लिए दो साल दौड़ाया कार्यपालक पदाधिकारी ने नगर पर्षद में कार्यरत हैं कार्यपालक पदाधिकारी जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला मेदिनीनगर : पलामू जिला उपभोक्ता फोरम ने मेदिनीनगर नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी पर 30 हजार का जुर्माना लगाया है. फोरम ने नक्शा पास नहीं करने के मामले की सुनवाई करते हुए […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 13, 2017 8:04 AM
न्याय. नक्शा के लिए दो साल दौड़ाया कार्यपालक पदाधिकारी ने
नगर पर्षद में कार्यरत हैं कार्यपालक पदाधिकारी
जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला
मेदिनीनगर : पलामू जिला उपभोक्ता फोरम ने मेदिनीनगर नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी पर 30 हजार का जुर्माना लगाया है. फोरम ने नक्शा पास नहीं करने के मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला पारित किया है.
फोरम द्वारा पारित आदेश में कहा है कि शिकायतकर्ता का नक्शा पास करें. साथ ही 30 हजार जुर्माना भी भरे. यदि 30 दिनों के अंदर जुर्माना नहीं भरा गया, तो नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी को नौ प्रतिशत के दर से ब्याज सहित राशि जमा करना होगा. फोरम ने शिकायतकर्ता अधिवक्ता राजेश्वर पांडेय द्वारा दायर मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला पारित किया है. इस मामले का केस नंबर- 53/2012 है.
क्या है मामला: अधिवक्ता राजेश्वर पांडेय ने मकान निर्माण के लिए नक्शा पास करने के लिए आवेदन नगर पर्षद में जमा किया था. बताया गया कि चार मार्च 2010 को नक्शा के साथ-साथ नक्शा पास कराने के लिए जरूरत के कागजात व 150 रुपये का शुल्क भी जमा किया था.
आरोप है कि नगर पर्षद द्वारा न तो इनके आवेदन को अस्वीकृत किया गया और ना ही नक्शा ही पारित किया गया. उन्हें हमेशा आजकल कह कर दौड़ाया गया. जब आवेदन जमा किये दो वर्ष से अधिक हो गया, तो श्री पांडेय इस मामले को लेकर उपभोक्ता फोरम में गये. 10 दिसंबर 2012 को उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर किया.
इस मामले में फोरम ने दोनों पक्षों की बात सुनी. इसके बाद इस नतीजे पर पहुंची की शिकायतकर्ता ने अपने शिकायत में जो बातें दर्ज की है, वह सत्य है. इसके बाद नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी नक्शा पास करते हुए जुर्माना भरने को कहा गया. इस मामले के शिकायतकर्ता अधिवक्ता राजेश्वर पांडेय ने कहा कि नगर पर्षद के लापरवाही के कारण उन्हें न सिर्फ आर्थिक क्षति हुई बल्कि वह परेशान भी रहे. क्षतिपूर्ति के लिए उन्होंने 80 हजार का दावा ठोका. इसकी सुनवाई करते हुए फोरम ने क्षतिपूर्ति के रूप में नगर पर्षद को 30 हजार रुपये का जुर्माना भरने को कहा.

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