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नेउरा पंचायत में 18 जलमीनार में छह बंद, पेयजल के लिए हो रही है परेशानी

ल जीवन मिशन के तहत सोलर अधारित जलमीनार करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण करायी गयी है.

बड़ी जलमीनार करीब 22 लाख तथा छोटी जलमीनार करीब साढ़े छह लाख रुपये की लागत से बनायी गयी है

एक बड़ी जलमीनार से साठ घरों को पानी दिया जाना था. अभी तक सभी के घरों तक पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप ही नहीं बिछाया गया है.

10 बड़ी जलमीनार तथा आठ छोटी जलमीनार हैं.

फोटो:18डालपीएच 05

प्रतिनिधि, चैनपुर

जल जीवन मिशन के तहत सोलर अधारित जलमीनार करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण करायी गयी है. सरकार सभी लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए योजना से जोड़ा है, लेकिन पेयजल आपूर्ति विभाग एवं संवेदकों कि मिलीभगत और लापरवाही के कारण सरकार की योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है. चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के नेउरा पंचायत में 18 जलमीनार का निर्माण विभिन्न गांवों में कराया गया था. जिसमें 10 बड़ी जलमीनार तथा आठ छोटी जलमीनार हैं. बड़ी जलमीनार करीब 22 लाख तथा छोटी जलमीनार करीब साढ़े छह लाख रुपये की लागत से बनायी गयी है. 18 जलमीनार में सात जलमीनार बंद है. और जो जलमीनार चालू है उससे भी सभी लोगों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि जिसके खेत में जलमीनार लगाया गया है. उसके अगल-बगल के पांच-सात घरों के लोगों को ही पानी मिल पा रहा है. पंचायत के गरदा गांव में ही सात जलमीनार हैं जिसमें सुबेदार मियां के घर के पास का जलमीनार शुरू से ही बंद पड़ी है, सरयू राम, बीरबल राम, भोला सिंह के घर के पास लगी जलमीनार उससे कुछ लोग ही लाभ ले रहे हैं. जबकि एक बड़ी जलमीनार से साठ घरों को पानी दिया जाना था. अभी तक सभी के घरों तक पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप ही नहीं बिछाया गया है. नेउरा मुख्य गांव ड्राई जोन इलाका है. वहां सात जलमीनार लगाये गये हैं. जिसमें कुम्हार टोली एवं मोमिनपूर के दोनों जलमीनार बंद पड़ा है. संचालित जलमीनार से सभी के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा. कुछ लोग ही इसका लाभ मिल पर रहा है. उसी तरह सिमरिया, टेमराई स्कूल के पास तथा रानी माई का जलमीनार बंद पड़ी है. गरदा गांव के ग्रामीण रवि कुमार, दिलीप पासवान नें बताया कि संवेदक जैसे-तैसे कार्य पूरा कर चले गये, लेकिन सभी के घरों तक पाइप भी नहीं लगाया गया है जबकि सभी से पानी के कनेक्शन के लिए आधार कार्ड भी ले लिया गया है. एक बड़े जलमीनार से मात्र आठ दस लोगों को ही पानी मिल पा रहा है. कुछ लोग इससे खेती पटाने का काम कर रहे हैं जबकि गरदा उतरवारी टोला तथा नरसली पर के दलित तबके के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं.

संवेदक को कहा है, लेकिन असर नहीं हुआ

पंचायत की मुखिया जमीला बीबी नें बताया कि बंद जलमीनार के लिए कई बार विभाग और संबंधित संवेदक को कहा गया है, लेकिन कोई असर नहीं हुआ. अब गर्मी में और अधिक पेयजल की समस्या विकराल हो जायेगी.

विभाग की लापरवाही है, सीएम को पत्र लिखेंगे

जिप सदस्य सह झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष फैजायल अहमद ने बताया कि सोलर अधारित जलमीनार तो लग गयी है, लेकिन कई जलमीनार बंद है. इसके लिए वह कई बार जिला की बैठक में आवाज उठायी है ,लेकिन कोई लाभ नहीं हो रहा. उन्होंने कहा कि इसमें विभाग की लापरवाही है. इसे लेकर वह मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखने वाले हैं.

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