बंद रहे सरकारी और निजी अस्पतालों के ओपीडी, चक्कर लगाते रहे मरीज

नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के अह्वान पर राज्य भर के सरकारी और निजी अस्पतालाें में डॉक्टरों ने मंगलवार को पांच घंटे तक कलमबंद हड़ताल की. राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के करीब 1800 डॉक्टरों ने सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक ओपीडी बंद रखा. इस दौरान परामर्श लेने आये मरीजों को परेशानी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के अह्वान पर राज्य भर के सरकारी और निजी अस्पतालाें में डॉक्टरों ने मंगलवार को पांच घंटे तक कलमबंद हड़ताल की. राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के करीब 1800 डॉक्टरों ने सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक ओपीडी बंद रखा. इस दौरान परामर्श लेने आये मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. मरीज सरकारी अस्पताल और निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे. दावा किया जा रहा था कि हड़ताल के दौरान इमरजेंसी चालू रहेगा, लेकिन हड़ताल के दौरान इमरजेंसी में परामर्श लेने गये सामान्य बीमारी से पीड़ित मरीजों काे डाॅक्टरों ने लौटा दिया. उनसे दोपहर दो बजे के बाद ओपीडी में आने को कहा गया.
रांची : सीमित अवधि के इस हड़ताल का समर्थन आइएमए झारखंड और झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विस एसाेसिएशन (झासा) ने भी किया था. दोनों ही संगठनों ने इस हड़ताल को सफल बताया है. रांची आइएमए के सचिव डॉ अमित मोहन ने बताया कि राजधानी के सभी अस्पतालों के अोपीडी आइएमए के निर्देश पर बंद रहे. आंदोलन पूरी तरह सफल रहा है. राजधानी में डॉक्टों ने काम नहीं किया है. निजी अस्पतालों के ओपीडी भी बंद रहे. उन्होंने कहा कि अस्पतालों की इमरजेंसी सेवा बहाल रही, जिससे मरीजों को परेशानी नहीं हुई.

उधर, झासा सचिव डॉ विमलेश सिंह ने बताया कि राज्य भर के सदर अस्पतालों, पीएचसी, सीएचसी और रेफरल अस्पतालों में डॉक्टरों ने दो बजे तक ओपीडी बंद रखा. रांची सदर अस्पताल का ओपीडी भी बंद रहा. आंदोलन असरदार रहा है. इससे यह स्पष्ट हो गया है कि डाॅक्टर चाहें, तो चिकित्सा सेवा को ठप करा सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमारी मांगें जायज हैं, इसलिए केंद्र सरकार को शीघ्र निर्णय लेना चाहिए. अगर सरकार हमारी मांगों को शीघ्र नहीं मानती है, तो नेशनल आइएमए के निर्देश पर शीघ्र ही बड़े रूप में आंदोलन चलाया जायेगा.
हड़ताली डॉक्टरों ने बंद कराया रिम्स ओपीडी
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में सामान्य दिनों की तरह ओपीडी संचालित हुआ, लेकिन दोपहर 12:30 बजे आइएमए एवं झासा पदाधिकारियों ओपीडी को बंद कराया. डॉ विमलेश के नेतृत्व में डॉक्टर रिम्स ओपीडी गये और डॉक्टरों को आइएमए के सदस्य होने की बात कर ओपीडी छोड़ने को कहा. इसके बाद आधा घंटा
तक ओपीडी प्रभावित रहा. हालांकि, पहले से जानकारी होने के कारण मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा पहले से कम थी. रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कहा कि ओपीडी बंद नहीं हुआ है.
दिल्ली में आयोजित रैली में शामिल हुए झारखंड के चिकित्सक
नेशनल आइएमए द्वारा मंगलवार को दिल्ली में आयोजित रैली में राज्य के चिकित्सक भी शामिल हुए. राज्य का प्रतिनिधित्व स्टेट आइएमए के अध्यक्ष डॉ एके सिंह, सचिव डॉ प्रदीप सिंह एवं वीमेंस डॉक्टर विंग की अध्यक्ष डॉ भारती कश्यप ने किया. बैनर लेकर राज्य के चिकित्सक रैली में शामिल हुए. रैली राजघाट से निकाली गयी, जो इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में जा कर समाप्त हुई. वहां एक आमसभा हुई, जिसमें आगे की रणनीति बनायी गयी.
इनकी पीड़ा कौन सुनेगा
डॉक्टर को दिखाने के लिए सुबह ही बोड़या से चली आयी थी. यहां आने पर पता चला कि डाॅक्टर हड़ताल पर हैं. बुखार और पेट में तेज दर्द है, लेकिन कोई देख नहीं रहा है. यहां पूछने पर बताया जा रहा है कि डॉक्टर दो बजे मिलेंगे.
सोमवार को बेटी को लेकर डॉक्टर के पास आयी थी. डॉक्टर साहब देखने के बाद कुछ जांच कराने के लिए लिखा था. आज सुबह आया, तो जांच घर बंद मिला. जांच रिपोर्ट ही नहीं मिल रही है. इसके अलावा डॉक्टर भी हड़ताल पर हैं.
ये हैं प्रमुख मांगें
चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों पर हो रहे हमले पर सख्त केंद्रीय कानून बने
एनएमसी व एनइएक्सटी का विरोध
चिकित्सकों पर हो रहे क्रिमिनल केस अविलंब बंद हों
अन्य पद्धति के चिकित्सकों द्वारा एलोपैथी की प्रैक्टिस करने पर रोक लगे
क्रिमिनल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट की विसंगति दूर हो
दवा (ब्रांड या जेनेरिक) और जांच लिखने की डॉक्टरों को आजादी हो
झोलाछाप के विरुद्ध सख्त कानून बने
सिंगल विंडो पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध करायी जाये
सरकारी स्वास्थ्य समितियों में आइएमए काे प्रतिनिधित्व मिले
दवा की कीमतों की भिन्नता समाप्त की जाये
आकस्मिक इलाज के उपरांत शुल्क न मिलने पर सरकार भरपाई करे
अगले वित्तीय वर्ष से स्वास्थ्य नीति का निर्धारण.
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