घूस लेनेवाले को पकड़ने में अव्वल, सजा दिलाने में फेल

लापरवाही. चार्जशीट के बाद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाता है एसीबी अमन तिवारी रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रिश्वत लेनेवाले को पकड़ने में रिकॉर्ड बनाया है. वहीं, दूसरी ओर रिश्वत लेनेवाले को ट्रायल के दौरान सजा दिलाने में फेल हो रहा है. एसीबी ने वर्ष 2016 में रिश्वत लेने के […]

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लापरवाही. चार्जशीट के बाद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाता है एसीबी
अमन तिवारी
रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रिश्वत लेनेवाले को पकड़ने में रिकॉर्ड बनाया है. वहीं, दूसरी ओर रिश्वत लेनेवाले को ट्रायल के दौरान सजा दिलाने में फेल हो रहा है. एसीबी ने वर्ष 2016 में रिश्वत लेने के आरोप में 84 मामले दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया था.
वर्ष 2017 में जनवरी से लेकर अप्रैल तक रिश्वत लेने से संबंधित 48 मामले दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज कर दूसरा नया रिकॉर्ड बनाया. इस बीच सितंबर 2016 से लेकर मई 2017 के बीच नौ माह में 12 आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हो गये, वह भी वर्षों पुराने मामले में. जिससे पता चलता है कि एसीबी रिश्वत लेने के आरोपियों को सजा दिलाने में फेल होता जा रहा है. एसीबी जब रिश्वत लेने के आरोप में किसी को गिरफ्तार करता है, तब उसके खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी दायर करता है. जब मामले में न्यायालय में ट्रायल शुरू होता है, तब आरोपी के खिलाफ एसीबी ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाता है. पर्याप्त गवाहों को भी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर पाता है, जिसका लाभ आरोपी को मिलता है. इससे यह भी सवाल उठता है कि आखिर किसी मामले का अनुसंधान एसीबी के अफसर कैसे करते हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि अनुसंधान के दौरान मामले में लापरवाही बरती जाती है.
केस स्टडी : एक
रिश्वत लेने के आरोप में फंसे शहर अंचल के तत्कालीन सहायक राजीव रंजन और उसके सहयोगी 19 मई को न्यायालय से बरी हो गये. दोनों को रिश्वत लेने के आरोप में 28 नवंबर, 2001 को गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने रिश्वत के 2500 रुपये म्यूटेशन कराने के नाम पर छोटे लाल से लिये थे. दोनों के खिलाफ 14 जनवरी को न्यायालय में आरोप पत्र भी समर्पित किया गया था. एसीबी न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया. इसलिए दोनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया.
केस स्टडी : दो
लोहरदगा जिला के किस्को प्रखंड के तत्कालीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अनिल कुमार सिन्हा रिश्वत लेने के आरोप से बरी हो गये. एसीबी की अदालत ने उन्हें साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. उन्हें 30 अक्तूबर, 2002 को 10, 500 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र संख्या 71/ 02 दिनांक 24 दिसंबर, 2002 को समर्पित किया गया था. ट्रायल के दौरान एसीबी उनके खिलाफ न्यायालय में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिस कारण आरोपी बरी हो गया.
केस स्टडी : तीन
बुढ़मू के तत्कालीन सीडीपीओ सुरेश कुमार सिन्हा को 16 वर्ष पुराने रिश्वत लेने के मामले में क्लीनचिट मिल गया. उन्हें 1500 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में वर्ष 1999 में पकड़ा गया था. उनके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र संख्या 23/01, दिनांक नौ अक्तूबर, 2001 को दायर किया गया था. इस मामले में सम्मन जारी करने के बावजूद न्यायालय में कोई गवाह उपस्थित नहीं हो पाया, जिसका लाभ आरोपी को मिला. एसीबी भी ट्रायल के दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर पाया.
केस स्टडी : चार बिजली विभाग के तत्कालीन कनीय अभियंता काफिल अंसारी व उसके सहयोगी बैजू महतो को 15 वर्ष पुराने रिश्वत लेने के मामले में इस वर्ष न्यायालय से क्लीनचिट मिल गया. दोनों पर बिजली कनेक्शन देने के नाम पर 8000 रुपये रिश्वत लेने का आरोप था. दोनों को रिश्वत लेने के आरोप में 17 अप्रैल, 2002 को गिरफ्तार किया गया था. दोनों आराेपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दायर किया गया था. मामले में ट्रायल के दौरान 13 लोगों की गवाही के बावजूद एसीबी ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया था.
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