लैंड डिजिटाइजेशन के चक्कर में नहीं मिल रहा है होम लोन

रांची : राजधानी समेत पूरे झारखंड में आवास ऋण यह कह कर स्वीकृत नहीं किया जा रहा है कि जमीन के दस्तावेज अप टू डेट नहीं हैं. बैंक प्रबंधन का कहना है कि डेढ़ वर्ष से चल रहे जमीन के दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन की वजह से बैंकों के लीगल अधिकारी जमीन के खतियान और रसीद […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

रांची : राजधानी समेत पूरे झारखंड में आवास ऋण यह कह कर स्वीकृत नहीं किया जा रहा है कि जमीन के दस्तावेज अप टू डेट नहीं हैं. बैंक प्रबंधन का कहना है कि डेढ़ वर्ष से चल रहे जमीन के दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन की वजह से बैंकों के लीगल अधिकारी जमीन के खतियान और रसीद का मिलान नहीं कर पा रहे हैं. बैंक प्रबंधन का दावा है कि इसकी वजह से अधिकतर मामलों में जांच रिपोर्ट सही नहीं मिल पा रही है.

निबंधन कार्यालय, जिला समाहरणालय के रिकार्ड रूम कंप्यूटर कक्ष और अंचल कार्यालय के बीच में किसी तरह का लिंकेज अब तक स्थापित नहीं हो पाया है. आवास ऋण के लिए सक्षम कार्यालय से भवन प्लान की स्वीकृति जरूरी है, जो समय पर नहीं मिल रहा है.

शिक्षा ऋण की भी यही स्थिति : शिक्षा ऋण की भी कमोबेश यही स्थिति है. इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन, लॉ और अन्य पेशेवर कोर्स के लिए बैंकों से पांच से नौ लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाता है.

इसमें अभ्यर्थी के अभिभावक को गारंटर बनाया जाता है, जिसमें यह कहा जाता है कि संबंधित अभ्यर्थी को नौकरी मिलने पर उसके ब्याज और मूल धन की राशि की कटौती की जायेगी. अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए इसमें जमीन के दस्तावेज को बंधक के रूप में रखने की सरकार ने इजाजत भी दी है. पर यह काम बैंक नहीं कर रहे हैं.

बैंक लोन देने के लिए तैयार, पर ग्राहक नहीं दे पाते दस्तावेज : यूको बैंक के आंचलिक प्रबंधक आरबी सहाय के अनुसार बैंक कर्ज देने के लिए तैयार हैं, लेकिन बैंक की तरफ से मांगे जानेवाले दस्तावेज ग्राहक नहीं दे पाते हैं. किसी भी कर्ज के लिए आयकर रिटर्न, जमीन का क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, कंपनी से संबंधित दस्तावेज और अन्य कागजात जमा कराना जरूरी है. इसके आधार पर ही ग्राहकों को उनकी जरूरत के कर्ज दिये जाते हैं. पर ये दस्तावेज समय पर बैंक में जमा ही नहीं कराये जाते हैं. अधिकतर मामलों में इसकी वजह से कर्ज अस्वीकृत कर दिया जाता है.

फैक्ट शीट : झारखंड में पिछले वित्तीय वर्ष में सभी बैंकों ने 81039.93 करोड़ लोन दिया था. यह कुल जमा का 43.33 प्रतिशत ही है. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की मानें, तो 2016-17 में बैंकों ने 186177.78 करोड़ के विरुद्ध 81 हजार करोड़ से कुछ अधिक ही कर्ज दिया था. बैंक ऑफ इंडिया का ऋण जमा अनुपात दर इस दौरान 26.44 फीसदी, सेंट्रल बैंक की तरफ से 19.33 फीसदी, यूनियन बैंक की तरफ से 21.52 फीसदी, सिंडिकेट बैंक की तरफ से 22.5 फीसदी, पंजाब नेशनल बैंक की तरफ से 20.42 प्रतिशत, काॅरपोरेशन बैंक की तरफ से 17.3 प्रतिशत, भारतीय महिला बैंक का 11.85 फीसदी, इंडियन बैंक का 16.45 फीसदी रहा था.

यानी इन बैंकों ने कुल डिपॉजिट के विरुद्ध कम कर्ज दिये थे. स्टेट बैंक, कैनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक, स्टेट बैंक ऑफ बिकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, बंधन बैंक, करूर वैश्य बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक, आइसीआइसीआइ बैंक, एक्सीस बैंक, कर्नाटक बैंक, एचडीएफसी बैंक ने अपने डिपाजिट की राशि में से 40 प्रतिशत से अधिक कर्ज दिये.

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