एक ही योजना में दोबारा काम कराने वाले इइ को किया जायेगा निलंबित

रांची: भवन निर्माण सचिव केके सोन ने एक ही योजना पर दोबारा काम कराने या प्रयास करनेवाले कार्यपालक अभियंताअों को निलंबित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर एक ही योजना का प्रस्ताव दो-दो प्रति अलग-अलग पत्रांक व दिनांक से भेजा जाता है और इसमें विभागीय निर्देश नहीं लिया जाता है, […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची: भवन निर्माण सचिव केके सोन ने एक ही योजना पर दोबारा काम कराने या प्रयास करनेवाले कार्यपालक अभियंताअों को निलंबित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर एक ही योजना का प्रस्ताव दो-दो प्रति अलग-अलग पत्रांक व दिनांक से भेजा जाता है और इसमें विभागीय निर्देश नहीं लिया जाता है, तो संबंधित कार्यपालक अभियंता को बिना कारण पृच्छा के ही निलंबित कर दिया जायेगा.
उन्होंने विभिन्न प्रमंडलों के साथ ही रांची प्रमंडल वन, टू व विशेष कार्य प्रमंडल में पाया है कि पहले जिस भवन में काम करा लिया जाता है, बाद में उसी भवन पर फिर से काम कराने का प्रस्ताव तैयार करके स्वीकृति के लिए भेजा जाता है. इस मामले को भवन सचिव ने गंभीरता से लिया है. उन्होंने तत्काल ऐसे मामलों में कार्रवाई का निर्देश दिया है. इसके साथ ही संबंधित कार्यपालक अभियंताअों से पूछा है कि प्रस्ताव में शामिल भरन में गत तीन वर्षों में कितना खर्च किया गया है और क्या-क्या कार्य कराये गये हैं. इसका विस्तृत प्रतिवेदन सचिव ने स्वीकृति आदेश व आवंटन आदेश के साथ मांगा है.
योजनाओं के प्रस्ताव का प्रमाण पत्र मांगा : सचिव ने इसका प्रमाण पत्र मांगा है कि अभी जिन योजनाओं के प्रस्ताव भेजे गये हैं, उनमें शामिल योजनाअों पर काम तीन साल के दौरान नहीं हुआ है. साथ ही यह भी प्रमाण पत्र देने को कहा गया है कि अगर तीन साल के दौरान काम कराये गये हैं, तो काम के दोहराव का क्या कारण है? इसके लिए क्या सक्षम प्राधिकार से निर्देश प्राप्त है? निर्देश में दिये गये प्रतिवेदन या चेक स्लिप के बिना अगर कोई योजना प्रस्ताव विभागीय अनुमोदन के लिए भेजा जाता है, तो संबंधित कार्यपालक अभियंता को सरकारी निर्देश की अवहेलना का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
एेसे पकड़ में आया मामला
सचिव ने गत दिनों कुछ योजनाअों पर प्रशासनिक अनुमोदन की प्रक्रिया के दौरान यह पाया कि योजना प्रस्ताव वाले भवन में कुछ दिन पहले ही कार्य कराये गये हैं. इसमें अच्छी-खासी राशि खर्च भी हुई है. इसके बाद ही उन्होंने निर्देश दिया कि अनावश्यक रूप से कार्यों का दोहराव न हो, क्योंकि इससे जनता की बड़ी राशि खर्च होती है.
बिना अधियाचना के नहीं होगा काम
भवन सचिव ने स्पष्ट किया कि अब बिना अधियाचना के काम नहीं होगा. उन्होंने कार्यपालक अभियंताअों से कहा कि ऐसे किसी भी कार्यालय भवन की मरम्मत या जीर्णोद्धार प्रस्ताव पर तब तक विचार नहीं किया जायेगा, जब तक कि उसके साथ उस कार्यालय के प्रधान की औपचारिक अधियाचना न हो. इसी तरह किसी आवासीय भवनों के मामले में संबंधित आवंटी या विशेष परिस्थिति में उनकी ओर से नामित सक्षम प्राधिकार के स्तर से प्राप्त आवेदन पर ही विचार किया जायेगा.
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