बाल विवाह पर कार्यशाला: बाल विवाह रोकने के लिए चलाना होगा अभियान

रांची: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रूपा कपूर ने कहा कि बाल विवाह पूरे देश में एक बड़ी समस्या है. हर क्षेत्र में यह अलग-अलग स्वरूप में मौजूद है. कहीं सामाजिक समस्या के कारण, तो कहीं आर्थिक कारणों की वजह से, कहीं परंपरा के नाम पर, तो कहीं ट्रैफिकिंग की वजह से बाल […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रूपा कपूर ने कहा कि बाल विवाह पूरे देश में एक बड़ी समस्या है. हर क्षेत्र में यह अलग-अलग स्वरूप में मौजूद है. कहीं सामाजिक समस्या के कारण, तो कहीं आर्थिक कारणों की वजह से, कहीं परंपरा के नाम पर, तो कहीं ट्रैफिकिंग की वजह से बाल विवाह हो रहा है. यह तभी समाप्त हो सकता है, जब हम इसके खिलाफ लगातार अभियान चलायें. उक्त बातें उन्होंने बाल विवाह पर आयोजित कार्यशाला में कही.

कार्यशाला का आयोजन होटल रेडिशन ब्लू में हुआ. उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रही है, पर पंचायतों में इसके खिलाफ जागरूकता फैलाना जरूरी है. देश में कहीं-कहीं बाल मित्र थाना मौजूद हैं, पर हम बाल मित्र थाना का कांसेप्ट राष्ट्रीय स्तर पर लांच करने वाले हैं. इसके अलावा चाइल्ड फ्रेंडली पंचायतों के लिए भी काम किया जा रहा है. इन पंचायतों में बच्चों के खिलाफ हिंसा, उनकी शिक्षा, बाल विवाह तथा उनसे जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार होगा.

झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि बाल विवाह जैसी समस्याअों को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है. पुलिस, प्रशासन, पंचायत, सामाजिक कार्यकर्ता अौर आम जनता सभी को आगे आना होगा, तभी यह समस्या दूर होगी. बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ मनोज कुमार ने कहा कि आयोग राज्य में बाल विवाह अौर बच्चों से जुड़े अन्य मुद्दों पर संजीदगी से काम कर रहा है. इस मुद्दे पर काम करनेवाली संस्थाअों, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रशासन अौर अन्य एजेसियों के बीच समन्वय जरूरी है. डॉ अशोक कुमार, रामचंद्र राम सहित अन्य वक्ताअों ने भी विचार रखे.
झारखंड में बाल विवाह
यूनाइटेड नेशंस पोपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड देश के उन तीन राज्यों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में बाल विवाह होते हैं. यहां बाल विवाह की दर लगभग पचास प्रतिशत है. देशभर में यह अौसत 47 प्रतिशत है. राज्य में देवघर बाल विवाह के मामले में सबसे आगे है. यहां बाल विवाह की दर 72.4 प्रतिशत है. गिरिडीह में 71.2 प्रतिशत अौर हजारीबाग में 65.7 प्रतिशत बाल विवाह के मामले सामने आते हैं. नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे 2005-06 के अनुसार झारखंड की 63.2 प्रतिशत मामले में लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हुई थी. 2007-08 में 18 वर्ष से पहले विवाह करने के मामले 55.7 प्रतिशत हैं.
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