हाथी पकड़ने के लिए वन विभाग ने बुलाया हंटर नवाब शहफत काे

रांची: देश के जाने-माने हंटर नवाब शहफत अली खान ने साहेबगंज जाकर हाथी से हो रही परेशानी का जायजा लिया. साहेबगंज में एक हाथी पिछले 22 अप्रैल से 26 जुलाई तक पहाड़िया जनजाति के नौ लोगों को मार चुका है. तीन लोगों को घायल कर चुका है. जानमाल की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची: देश के जाने-माने हंटर नवाब शहफत अली खान ने साहेबगंज जाकर हाथी से हो रही परेशानी का जायजा लिया. साहेबगंज में एक हाथी पिछले 22 अप्रैल से 26 जुलाई तक पहाड़िया जनजाति के नौ लोगों को मार चुका है. तीन लोगों को घायल कर चुका है. जानमाल की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने उच्चस्तरीय टीम का गठित की थी. टीम ने 25 जुलाई को अपनी रिपोर्ट राज्य के मुख्य वन प्रतिपालक को दे दी है. तीनों उपायों पर विचार किया जा रहा है.
जांच टीम की अनुशंसा के बाद हैदराबाद से नवाब शहफत अली खान के नेतृत्व में हंटरों का एक दल साहेबगंज आया है. कुछ दिनों तक अध्ययन करने के बाद श्री खान की टीम राज्य सरकार को एक रिपोर्ट देगी. वैसे वन विभाग ने हाथी को शूट करने का अंतिम विकल्प रखा है. श्री खान को फिलहाल हाथी को कैद करने के उपाय पर विचार करने को कहा गया है. हाथी बिहार से भटकर झारखंड की ओर आ गया है.
तीन अनुशंसा की है कमेटी ने
वन विभाग से बनायी गयी उच्च स्तरीय टीम ने तीन अनुशंसा की है. इसमें हाथी को पकड़कर कहीं रेसक्यू करने की सलाह दी गयी है. इसके लिए असम के एक विशेषज्ञ से बात भी की गयी है. राज्य सरकार के पास हाथी को एक-स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की सुविधा नहीं है. कमेटी ने हाथी को महावत को देकर कुछ दिन आम लोगों के बीच रखने की सलाह भी दी है. इसके लिए उत्तर प्रदेश के महावतों से बात की गयी. महावतों की एक टीम ने आकर हाथी को इस लायक ट्रेड करने की सहमति भी जतायी है. तीसरा और अंतिम विकल्प के रूप में हाथी को शूट करने की बात कही गयी है. इसके लिए नवाब शहफत अली खान से भी बात की गयी है.
पश्चिम बंगाल की टीम लगी है भगाने में : विभाग ने पश्चिम बंगाल से हाथी को भगाने वाली एक टीम बुलायी है. टीम के लोगों को पटाखा, मशाल, मिर्ची पाउडर दिया गया है. हाथी आने की सूचना मिलते ही बंगाल के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं. 10 होम गार्ड के जवान भी लोगों की सुरक्षा में लगे हैं.
झारखंड में नौ साल पहले हुआ है शूट : झारखंड में सरकार की अनुमति से 2008 में एक हाथी को मारा गया है. इसके बाद राज्य सरकार ने किसी जानवर को मारने की अनुमति नहीं दी है. बिहार पिछले तीन-चार वर्षों में तीन हाथियों को मरवा
चुका है.
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