नर्मिल महतो नहीं होते, तो शायद झारखंड नहीं बनता

निर्मल महतो नहीं होते, तो शायद झारखंड नहीं बनता शहीद निर्मल महतो की शहादत दिवस पर विशेषअोम प्रकाश महतोरांची. झारखंड आंदोलन के दौरान अनेक योद्धाअों ने कुर्बानियां दी, जिनकी बदौलत अलग राज्य बना. शहीदों की सूची काफी लंबी है लेकिन निर्मल महतो का नाम इनमें सबसे ऊपर आता है. झारखंड आंदोलन के दौरान राज्य में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

निर्मल महतो नहीं होते, तो शायद झारखंड नहीं बनता शहीद निर्मल महतो की शहादत दिवस पर विशेषअोम प्रकाश महतोरांची. झारखंड आंदोलन के दौरान अनेक योद्धाअों ने कुर्बानियां दी, जिनकी बदौलत अलग राज्य बना. शहीदों की सूची काफी लंबी है लेकिन निर्मल महतो का नाम इनमें सबसे ऊपर आता है. झारखंड आंदोलन के दौरान राज्य में सबसे ज्यादा भूचाल आठ अगस्त 1987 को आया था. उसी दिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष निर्मल महतो की हत्या जमशेदपुर के चमरिया गेस्ट हाउस में कर दी गयी थी. उनकी हत्या अभी तक झारखंड में सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या है. कहा जाता है कि अगर शहीद निर्मल महतो नहीं होते, तो शायद झारखंड नहीं बना होता. लेकिन शहादत के बाद आजसू अौर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जो ताकत दिखायी, उससे आंदोलन को बल मिला. निर्मल महतो की हत्या की खबर उन दिनों दूरदर्शन पर प्रसारित की गयी थी. पहली बार सरकारी मीडिया में झारखंड मुक्ति मोर्चा का नाम आया था. 1986 में निर्मल महतो ने ही आजसू का गठन किया था. निर्मल महतो को यह पता था कि झामुमो की लड़ाई का अपना तरीका है, दायरा है. वह अलग राज्य पाने के लिए पर्याप्त नहीं है. कहीं न कहीं छात्रों अौर युवाअों को जोड़ना होगा. यही वह ताकत होगी, जो जान जोखिम में डाल कर भी आंदोलन करेगी. हो सकता है कि निर्मल दा के मन में यह बात होगी कि अगर हिंसक आंदोलन की जरूरत पड़ी, तो बगैर झामुमो को सामने लाये छात्र संगठन यह काम कर सकता है. निर्मल महतो एक व्यक्ति नहीं थे, अपने आप में एक संगठन थे. जाति अौर धर्म से ऊपर हमेशा सोचा करते थे कि शोषण से मुक्ति कब अौर कैसे मिलेगी. झारखंड से गरीबी दूर कैसे होगी. कैसे जल, जंगल अौर जमीन पर यहां के आदिवासियों- मूलवासियों को कब्जा दिलाया जाये. उनका जीवन मात्र 37 वर्षों का था, लेकिन इसी 37 वर्ष में उन्होंने जो कर दिया, उसे आज भी याद किया जाता है. लेखक कुरमी छात्र मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष हैं

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >