निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों की फीस तय नहीं

रांची: राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल बच्चों की फीस अब तक तय नहीं हुई है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी बीपीएल बच्चों का नामांकन अनिवार्य किया गया है. प्रावधान के अनुरूप निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल बच्चों का शुल्क सरकार को वहन करना है, […]

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रांची: राज्य के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल बच्चों की फीस अब तक तय नहीं हुई है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी बीपीएल बच्चों का नामांकन अनिवार्य किया गया है. प्रावधान के अनुरूप निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल बच्चों का शुल्क सरकार को वहन करना है, पर झारखंड में अब तक निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल बच्चों का शुल्क तय नहीं हुआ है. इस कारण निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों की पढ़ाई का मामला अधर में लटक गया है.

शिक्षा विभाग ने शुल्क निर्धारण के लिए वर्ष 2012 में ही प्रस्ताव तैयार किया था. विभाग ने एक बीपीएल बच्चे के लिए प्रति वर्ष 5100 रुपये देने का प्रस्ताव तैयार किया था. प्रस्ताव वित्त विभाग भेजा गया था. वित्त विभाग ने पहली बार प्रस्ताव को यह कहते वापस कर दिया था कि सभी स्कूलों के लिए एक समान शुल्क का निर्धारण कैसे किया जा सकता. इसके बाद शिक्षा विभाग ने फिर से प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था. इसके बाद मामले में दूसरे राज्यों की स्थिति के अध्ययन की बात कही गयी. आरटीइ लागू होने के लगभग चार वर्ष बाद भी राज्य में बीपीएल बच्चों के शुल्क का निर्धारण नहीं हो सका है. शुल्क निर्धारण नहीं होने के कारण निजी स्कूलों ने जिन बीपीएल बच्चों का नामांकन लिया था, उनका भी शुल्क स्कूलों को नहीं मिला है.

राज्य सरकार द्वारा बीपीएल बच्चों का शुल्क तय नहीं किये जाने के कारण केंद्र सरकार ने इस मद में अब तक राशि नहीं दी है. केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि जब तक राज्य सरकार शुल्क निर्धारण नहीं करेगी, तब तक इस मद में राशि नहीं दी जायेगी.

स्कूल नहीं लेते नामांकन : राज्य के निजी स्कूल भी प्रावधान के अनुरूप बीपीएल बच्चों का नामांकन नहीं लेते हैं. प्रारंभ में राज्य सरकार के दबाव में स्कूलों ने कुछ बीपीएल बच्चों का नामांकन लिया, लेकिन फीस नहीं मिलने के कारण स्कूलों ने धीर-धीरे बच्चों का नामांकन लेना छोड़ दिया.

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