राज्य के 75% आदिवासी बच्चे कुपोषित : राज्यपाल

रांची: राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि झारखंड में प्राकृतिक संपदा तो खूब है, लेकिन मानव संपदा की स्थिति अच्छी नहीं है. मंगलवार को जमशेदपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में 26 फीसदी लोग आदिवासी हैं और इतनी बड़ी आबादी में 75 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. राज्यपाल द्रौपदी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची: राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि झारखंड में प्राकृतिक संपदा तो खूब है, लेकिन मानव संपदा की स्थिति अच्छी नहीं है. मंगलवार को जमशेदपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में 26 फीसदी लोग आदिवासी हैं और इतनी बड़ी आबादी में 75 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं.

राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने बिष्टुपुर स्थित रामदास भट्टा में मिड डे मील तैयार करनेवाली एजेंसी ‘इस्कॉन’ की अोर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘झारखंड की धरती में सोना है. यहां खनिज संपदा, भू संपदा, प्राकृतिक संपदा है, लेकिन मानव संपदा की स्थिति अच्छी नहीं है. यही वजह है कि झारखंड राज्य तो अमीर है, लेकिन यहां के लोग गरीब हैं.

झारखंड की कुल आबादी का 26 फीसदी लोग अादिवासी हैं. अलग-अलग कुल 32 प्रकार की आदिवासी जातियां झारखंड में निवास कर रही हैं, लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि इतनी बड़ी आबादी के करीब 75 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं.’ हालांकि राज्यपाल ने यह भी कहा कि मानव संपदा के विकास के लिए सरकार काम कर रही है और उन्हें यह उम्मीद है कि एक दिन झारखंड देश का नंबर वन राज्य होगा. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति ठीक नहीं है और इसको सुधारने के लिए सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी आगे आने की जरूरत है. इससे पूर्व कार्यक्रम में राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया. राज्यपाल ने इस्कॉन के सेंट्रल किचन का निरीक्षण कर देखा कि वहां किस तरह बच्चों के लिए हाइजनिक तरीके से मिड डे मिल तैयार किया जाता है.

मैं गर्वनर विद द डिफरेंस हूं : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने खुद को ‘गवर्नर विद द डिफरेंस’ कहा. उन्होंने कहा, ‘राज्य के पूर्व राज्यपालों के साथ ही अन्य राज्यपालों को भी जानती हूं, जो कॉलेज-यूनिवर्सिटी के कार्यक्रमों में ही मुख्य रूप से शिरकत करते थे, लेकिन मैं गर्वनर विद द डिफरेंस हूं. मैं समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्या से द्रवित हो जाती हूं. यही कारण है कि अक्सर मैं अस्पताल व छोटे-छोटे स्कूल का दौरा करती हूं अौर बच्चों को मोटिवेट करती हूं.’
सर्टिफिकेट मिल जाता है, जानकारी नहीं होती : राज्यपाल ने सरकारी स्कूल के बच्चों की नींव मजबूत करने पर जोर दिया. कहा कि बच्चों की उपस्थिति बढ़े अौर आनंददायक माहौल में बच्चों को पढ़ाई करवायी जाये, इसका प्रयास होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘स्कूलों में इस प्रकार की शिक्षा दी जाये, जिससे न सिर्फ बच्चों को पास होने के बाद सर्टिफिकेट मिले, बल्कि उन्हें वास्तव में कुछ जानकारी हासिल भी हो.’
एमजीएम में हुई मौत की जांच के लिए कमेटी गठित

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में एक माह में 60 बच्चों की मौत के कारणों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कमेटी गठित की गयी है. इससे संबंधित एक आदेश स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने जारी किया है. उन्होंने अपने आदेश में लिखा है कि 27.8.17 एवं 28.8.17 को स्थानीय समाचार पत्र ‘प्रभात खबर’ में एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर में विगत छह माह में 106 बच्चों की मृत्यु होने तथा विगत एक माह में 60 से अधिक बच्चों की मृत्यु होने की सूचना प्रकाशित हुई है. एमजीएम चिकित्सा अस्पताल जमशेदपुर में बच्चों की हुई मृत्यु के कारणों की जांच के लिए निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय समिति का गठन किया जाता है. समिति के अध्यक्ष निदेशक प्रमुख डॉ सुमंत मिश्रा, सदस्य निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ एएन मिश्र व उपनिदेशक कोल्हान प्रमंडल चाईबासा डॉ हिमांशु भूषण बरवार होंगे. समिति बच्चों की मृत्यु के कारणों की जांच कर 48 घंटे के अंदर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध करायेगी.

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