रांची : कैबिनेट ने एसटीएफ में पदस्थापित डीएसपी मधुसूदन को बरखास्त करने का फैसला किया है. उन पर फरजी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने का आरोप है. बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 1993 में उनकी नियुक्ति की गयी थी. राज्य गठन के बाद उनकी सेवा झारखंड सरकार को सौंपी गयी थी.
क्या िदया था तर्क: फरजी जाति प्रमाण पत्र पर लगे आरोपों के सिलसिले में डीएसपी ने यह तर्क दिया था कि उनके पिता के मित्र रामेश्वर पासवान ने उनको गोद लिया था. इसकी जानकारी उनको बहुत दिनों बाद मिली. उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा ली गयी परीक्षा में शामिल होते समय भी अपने पिता का नाम रामेश्वर पासवान लिखा था और अनुसूचित जाति के कोटे से नियुक्त हुए थे. उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई के दौरान भी अनुसूचित जाति को मिलने वाला लाभ लिया.
जांच में नहीं मिला प्रमाण पत्र: फरजी प्रमाण पत्र के मामले में सरकार द्वारा की गयी जांच के बाद यह पाया गया कि गोद लेने से संबंधित कोई कानूनी प्रमाण पत्र उनके पास नहीं था. मुखिया और नोटरी पब्लिक द्वारा किये गये शपथ पत्र के आधार पर उन्होंने गोद लेने का दावा किया था. जांच में पता चला कि वह बनिया समुदाय के सदस्य हैं. जांच के दौरान इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला कि गोद लेने के बाद वह उस व्यक्ति के साथ रहे हों, जिनके द्वारा डीएसपी गोद लेने की बात कह रहे हैं. इस बाबत कानूनी लड़ाई भी हुई थी. जिसमें अदालत ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया था. मामले में जांच रिपोर्ट और न्यायिक फैसले के आलोक में लोक सेवा आयोग ने बरखास्त करने सहमति प्रदान की थी.