ड्रग टेस्टिंग लैब में चार माह से नहीं हो रही जांच

रांची : स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैब नामकुम में पिछले चार महीनों से दवाओं की जांच बंद है, क्योंकि वहां दवाओं की जांच करने के लिए कोई औषधि विश्लेषक नहीं है. जून 2017 में तत्कालीन औषधि विश्लेषक सत्येंद्र सिंह का कांट्रैक्ट समाप्त हो गया. उसके बाद उन्हें अवधि विस्तार नहीं मिली है और न ही कोई […]

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रांची : स्टेट ड्रग टेस्टिंग लैब नामकुम में पिछले चार महीनों से दवाओं की जांच बंद है, क्योंकि वहां दवाओं की जांच करने के लिए कोई औषधि विश्लेषक नहीं है. जून 2017 में तत्कालीन औषधि विश्लेषक सत्येंद्र सिंह का कांट्रैक्ट समाप्त हो गया. उसके बाद उन्हें अवधि विस्तार नहीं मिली है और न ही कोई नया औषधि विश्लेषक को नियुक्त किया गया है.

सूत्रों ने बताया कि इस समय लैब में विभिन्न ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा जांच के लिए भेजी गयी 50 दवाओं की रिपोर्ट लंबित है. बताया गया कि टेक्निकल स्टाफ ने दवाओं की जांच कर ली है. पर जब तक औषधि विश्लेषक इस पर साइन नहीं करते तब तक रिपोर्ट नहीं जारी की जा सकती. लैब में अभी केवल दो ही टेक्निकल स्टाफ हैं. वे दोनों भी अनुबंध पर ही कार्यरत हैं.
ये हाल है
औषधि विश्लेषक का कॉन्ट्रैक्ट खत्म, नये की नियुक्ति अब तक नहीं हुई
ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा जांच के लिए भेजी गयी 50 दवाओं की रिपोर्ट लंबित
अभी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई
ड्रग कंट्रोलर विभाग के सूत्रों ने बताया कि औषधि विश्लेषक की नियुक्ति के लिए अभी प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है. इसके लिए विज्ञापन जारी कर बी. फार्मा कर चुके उम्मीदवारों से अावेदन मंगाया जायेगा. इसके बाद इंटरव्यू होगा. तब कहीं नियुक्ति होगी. इस पूरे मामले में तीन से चार माह लग जायेंगे. तब तक लैब में दवाओं की जांच बंद रहेगी.
क्या पड़ रहा है प्रभाव
दवाओं की जांच रिपोर्ट नहीं मिलने की वजह से ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा संदिग्ध दवा विक्रेताओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है और न ही नयी दवा को जांच के लिए भेजा जा रहा है. ड्रग इंस्पेक्टर परेशान हैं कि कहीं छापेमारी करें भी, तो सैंपल को जांच के लिए कहां भेजे. हालांकि, जब्त इंजेक्शन को जांच के लिए सीडीटीसी गुवाहाटी भेजा जाता है. केवल कैप्सूल, टेबलेट व सिरप की जांच रांची स्थित लैब में होती है.
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