झारखंड : हर आंख नम थी शहीद की अंतिम विदाई की बेला में

रांची/चान्हो : मणिपुर में 15 नवंबर को उग्रवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए सेना के जवान जयप्रकाश उरांव का अंतिम संस्कार शुक्रवार को उसके पैतृक गांव नवाडीह में सैनिक सम्मान के साथ किया गया. सेना के बैंड द्वारा बजायी गयी मातमी धुन के बीच अंतिम यात्रा में असम रेजिमेंट, बिहार रेजिमेंट के जवानों के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची/चान्हो : मणिपुर में 15 नवंबर को उग्रवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए सेना के जवान जयप्रकाश उरांव का अंतिम संस्कार शुक्रवार को उसके पैतृक गांव नवाडीह में सैनिक सम्मान के साथ किया गया.
सेना के बैंड द्वारा बजायी गयी मातमी धुन के बीच अंतिम यात्रा में असम रेजिमेंट, बिहार रेजिमेंट के जवानों के अलावा हजारों की भीड़ श्रद्धांजलि देने पहुंची. गांव के निकट स्थित कब्रिस्तान में जवानों ने गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच शहीद को अंतिम सलामी देकर वीर सपूत को अलविदा किया. अंतिम संस्कार के बाद विधायक गंगोत्री कुजूर ने झारखंड सरकार की ओर से शहीद की पत्नी को 10 लाख रुपये का चेक दिया व असम राइफल के जवानों ने अपनी ओर से उन्हें एक लाख आठ हजार की नकद राशि प्रदान की.
इससे पहले शहीद जयप्रकाश उरांव को लेकर क्षेत्र में पहली बार अभूतपूर्व जोश व जज्बा देखने को मिला.हाथों मेें तिरंगा लिए लोग सुबह से ही मांडर के चौक-चौराहों पर शहीद की एक झलक पाने के इंतजार में खड़े थे. सेना के वाहन में शहीद का पार्थिव शरीर काफिले के साथ जैसे ही मांडर के कंदरी मोड़ पहुंचा, समूचा क्षेत्र शहीद जयप्रकाश उरांव अमर रहे, भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारे से गूंज उठा. यह सिलसिला शहीद के पैतृक गांव नवाडीह तक जारी रहा. बीजूपाड़ा में शहीद के अंतिम दर्शन व नमन के लिए जनप्रतिनिधियों, ग्रामीण व स्कूली बच्चों की भारी भीड़ जमा थी. यहां से मोटरसाइकिल जुलूस की शक्ल में शहीद के पार्थिव शरीर को नवाडीह तक ले जाया गया. रास्ते में भी हर जगह ग्रामीण व स्कूली बच्चे शहीद के अंतिम दर्शन के लिए हाथ में तिरंगा व फूल लेकर मानव शृंखला बनाकर खड़े थे. जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर उसके घर पहुंचा.
शहीद की पत्नी एमा संगीता लकड़ा व उसकी बहनों के चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया. शहीद के वृद्ध माता-पिता लक्ष्मी उरांइन व सुकरा उरांव भी फफक कर रो पड़े. संगीता लकड़ा बार-बार बेहोश हो जा रही थी. होश में आने पर वह अपनी बेटियों से कह रही थी. देख बेटी का होई गेलउ. पापा कइह रहउ जन्मदिन में बड़का केक लेके आबउ. आउर आब इ का होई गेलउ. आब तोर ले बड़का के केक केलाइन देतउ. उसे चुप कराने के प्रयास में अन्य की आंखों से भी आंसू बह रहे थे.
एक वृद्ध महिला चुमानी उरांइन सभी को कुड़ुख में समझा रहा थी कि होरमर गी आ डहरेन काना रई. जीया नू दु:ख तो रई. लेकिन जिया नू पखना लदना के सबर नन्ना रई (सभी को उसी रास्ते पर जाना है. दिल में बहुत दुख है, लेकिन पत्थर रख कर सब्र करना है). इसी माहौल में लोग अपने वीर सपूत की एक झलक पाने के लिए बेताब थे. भीड़ के कारण पांव रखने तक की जगह नहीं थी. बाद में अंतिम यात्रा निकाली गयी. भौवा उरांव व मघी उरांव ने अंतिम प्रार्थना का कार्य संपन्न कराया.
शहीद की अंतिम विदाई में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, पूर्व विधायक देव कुमार धान, एडीजी रेजी डुंगडुंग, डीआइजी हेमंत टोप्पो, सैनिक कल्याण निदेशालय के कर्नल पीके सिंह, जिप सदस्य हेमलता उरांव, बीडीओ प्रवीण कुमार, सीओ प्रवीण कुमार सिंह, डीएसपी पुरुषोत्तम कुमार सिंह, थाना प्रभारी, सांसद प्रतिनिधि दीनानाथ मिश्रा, उप प्रमुख चंदन गुप्ता, जिला बीस सूत्री सदस्य शफीक अंसारी, भाजपा की सोनी तबस्सुम, प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष सतीश कुमार, ओबीसी मोर्चा के मंत्री कृष्ण मोहन कुमार, मुखिया मोहन उरांव, दुखना उरांव, बासोमणि देवी, अनिल कुमार भगत, अजीत सिंह, मो इश्तियाक, मो मोजीबुल्लाह, विजय महतो, संतोष कुमार मुख्य रूप से शामिल थे.
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