लापरवाही जेपीएससी व सरकार की तो प्रार्थी जिम्मेवार कैसे हुआ: हाइकोर्ट

रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डा एसएन पाठक की अदालत ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जेपीएससी व सरकार की लापरवाही के कारण व्याख्याता पद पर नियुक्ति में विलंब हुआ. इसके लिए प्रार्थी को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता है. वैसी स्थिति में अदालत ने राज्य सरकार को प्रार्थी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डा एसएन पाठक की अदालत ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जेपीएससी व सरकार की लापरवाही के कारण व्याख्याता पद पर नियुक्ति में विलंब हुआ. इसके लिए प्रार्थी को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता है. वैसी स्थिति में अदालत ने राज्य सरकार को प्रार्थी को वर्ष 2008 से ही व्याख्याता की मान्यता देने का आदेश दिया. प्रोन्नति सहित अन्य लाभ की गणना उपरोक्त वर्ष से ही की जायेगी.
अदालत ने कहा कि प्रार्थी को वर्ष 2008 में व्याख्याता नियुक्ति परीक्षा में असफल घोषित किया गया था. बाद में उसे सफल घोषित करते हुए वर्ष 2010 में उसकी नियुक्ति की गयी. विलंब के लिए प्रार्थी को जिम्मेवार नहीं माना जा सकता है. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता साैरभ शेखर ने अदालत को बताया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने वर्ष 2008 में व्याख्याता नियुक्ति परीक्षा ली थी. परिणाम जारी किया गया, तो प्रार्थी डॉ मधु मिश्रा को फेल कर दिया गया. प्रार्थी ने सूचना के अधिकार के तहत सफल घोषित अभ्यर्थियों का मार्क्स मांगा.
आयोग ने सूचना दी, जिसमें प्रार्थी से कम अंक लाने वाले एक अभ्यर्थी को सफल घोषित किया था. गलती सामने आने पर उसका समाधान नहीं हुआ, तो प्रार्थी डॉ मधु मिश्रा ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की. अदालत के आदेश के बाद प्रार्थी को वर्ष 2010 में व्याख्याता के पद पर नियुक्त किया गया.
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