रांची ( ऑड्रे हाउस) : राजभवन में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन शनिवार को डॉ मुजफ्फर हुसैन द्वारा लिखित पुस्तक महली जनजाति का राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का लोकार्पण माननीय विधानसभा स्पीकर श्री दिनेश उराँव, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा, शिक्षा मंत्री श्रीमति नीरा यादव, श्री सरयू राय, श्री अमर बाउरी, श्री बालमुकुंद पांडे, सामाजिक विज्ञान संकाय डीन श्री आई के चौधरी, डॉ राजकुमार द्वारा किया गया. यह एक शोधपरक पुस्तक है. इसमें महली जनजाति के जीवन की सभी पहलुओं को दर्शाया गया है. हिंदी में लिखी इस पुस्तक की भाषा सरल एवं ज्ञानवर्धक है. शिल्पी कार्य में दक्ष और प्रवीण मानी जाने वाली यह जनजाति अन्य समुदायों के लिए किस तरह उपयोगी और उनके जीवन का हिस्सा है, इसे बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया गया है.
महली जनजाति पर लिखी गयी पुस्तक का लोकार्पण, जुटे कई दिग्गज
रांची ( ऑड्रे हाउस) : राजभवन में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन शनिवार को डॉ मुजफ्फर हुसैन द्वारा लिखित पुस्तक महली जनजाति का राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का लोकार्पण माननीय विधानसभा स्पीकर श्री दिनेश उराँव, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा, शिक्षा मंत्री श्रीमति नीरा यादव, श्री सरयू राय, श्री अमर […]
साथ ही, सरकारी योजनाओं से सांमजस्य स्थापित कर कैसे इन्हें रोजगार से जोड़ा जाये, इसकी भी विस्तृत जानकारी दी गई है. पुस्तक लिखने के उद्देश्य पर डॉ मुजफ्फर हुसैन ने बताया कि महली जनजाति का मुख्य कार्य बांस पर निर्भर होता है. वहीं, खाने एवं स्वस्थ्य रहने के लिए ये साग का उपयोग बहुतायत में करते हैं. साग में औषधीय गुण होने के चलते यह उसका विभिन्न प्रकार से प्रयोग करते हैं. इसलिए बांस एवं साग की खेती से इन्हें जोड़कर इनके आर्थिक विकास की असीम संभावनाओं को धरातल पर उतारने की यह एक छोटी कोशिश है.
पुस्तक में इनके बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है, जो शोध छात्रों के साथ-साथ आमलोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होगी. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में महली जनजाति की कुल आबादी 1,52,663 है. इनमें सबसे अधिक आबादी 31,764 रांची जिला एवं सबसे कम आबादी 75 कोडरमा जिला में निवसित हैं. मालूम हो कि डॉ मुजफ्फर हुसैन पेशे से पत्रकार हैं. इनका निवास स्थान एदलहातू मोरहाबादी है. पुस्तक लिखने के अलावे इन्होंने कई शोध आलेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल के लिए लिखा है. इनके लेख कई समाचार पत्र-पत्रिकाओं और शोध संस्थानों में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं. समाचार पत्रों में छपे इनके लेख सरकारी योजनाओं की विस्तृत व्याख्या करती है. आकाशवाणी के रांची केंद्र से समय-समय पर विभिन्न विषयों पर इनकी वार्तायें प्रसारित होती रही हैं.
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