औपचारिकताएं पूरी करने पर भी बैंक नहीं दे रहे कर्ज

रांची: राजधानी रांची में राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेना आसान नहीं है. सभी बैंकों के अलग-अलग नियम कायदे हैं. इन औपचारिकताओं को पूरा करने पर भी लोगों को कर्ज नहीं मिल रहा है. राजधानी में कर्ज नहीं देनेवाले बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक सरीखे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची: राजधानी रांची में राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेना आसान नहीं है. सभी बैंकों के अलग-अलग नियम कायदे हैं. इन औपचारिकताओं को पूरा करने पर भी लोगों को कर्ज नहीं मिल रहा है. राजधानी में कर्ज नहीं देनेवाले बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक सरीखे बैंक अग्रणी हैं.

बैंकों की तरफ से अब किसी भी तरह के कर्ज के लिए आधार लिंक्ड खाते का होना अनिवार्य कर दिया गया है. बैंकों में प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी कार्यक्रम, ट्रेड लोन, प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, प्रधानमंत्री आवास योजना, रिटेल लोन, पर्सनल लोन, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के आवेदकों को काफी लंबे समय तक उलझाये रखा जाता है.
छोटे-छोटे कारणों से रद्द किये जा रहे हैं आवेदन
एक महिला एम सिन्हा ने इलाहाबाद बैंक को मोरहाबादी शाखा से 13 लाख का कर्ज लेने का आवेदन दिया था. उनका आवेदन इसलिए रद्द कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने खाते में ट्रांजैक्शन नहीं दिखाया. वहीं, दूसरी ओर एचइसी के आवासीय परिसर में टेंट हाउस चलाने के लिए कर्ज लेना चाह रहे उमाशंकर वर्मा को कर्ज नहीं देने का कारण, एचइसी की जमीन में दुकान दिखाना बताया गया. इन्होंने इलाहाबाद बैंक की हटिया शाखा में आवेदन दिया था. जिला उद्योग केंद्र से इनका आवेदन स्वीकृत कर बैंक के पास भेजा गया था.
क्या-क्या दस्तावेज मांगे जाते हैं
बैंकों द्वारा सबसे पहले कर्ज लेनेवाले आवेदकों से उनका पैन कार्ड, आधार कार्ड, तीन वर्ष का आयकर रिटर्न, बैंक खाते का छह महीने का ट्रांजैक्शन मांगा जाता है. आवास ऋण अथवा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के लिए घर और जमीन के सारे दस्तावेज देना जरूरी हैं. इसी आधार पर उसकी लीगल रिपोर्ट मंगायी जाती है. इतना ही नहीं ट्रेड अथवा पीएमइजीपी कर्ज के लिए दुकान का एग्रीमेंट पेपर, जीएसटीएन नंबर, ट्रेड लाइसेंस का होना भी अनिवार्य किया गया है.
पैन कार्ड के जरिये कर ली जाती है आवेदकों के सिविल की जांच
पैन कार्ड के जरिये आवेदकों के सिविल की जांच की जाती है. इसमें 750 अंक लाने पर ही कर्ज की स्वीकृति होती है. इससे अधिक स्कोर वालों को बेहतर माना जाता है और उनके कर्ज की स्वीकृति भी तुरंत होती है. आज कल बजाज फायनांस से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कई सामग्रियां लोग खरीद लेते हैं. इतना ही नहीं क्रेडिट कार्ड धारकों के इंस्टालमेंट का पैसा भी कर्ज के रूप में ही दिखता है. इतना ही नहीं अगर आपने गोल्ड लोन ले रखा है, तो उसका भी ब्योरा सिविल रिपोर्ट में दिखता है. यानी अगर कोई व्यक्ति पर्सनल लोन ले रखा है और कई चीजें बजाज फायनांस से खरीदी है, तो उसके सिविल में तीन से चार कर्ज दिखेगा.
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