शिकारीपाड़ा में हुआ पुनर्मतदान

दुमका: दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बूथ नंबर 100 प्राइमरी स्कूल जामकांदर एवं बूथ नंबर 101 अपग्रेडेड मिडिल स्कूल असना में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुनर्मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. बूथ नंबर 100 प्राइमरी स्कूल जामकांदर में 39 प्रतिशत मतदाताओं ने एवं बूथ नंबर 101 अपग्रेडेड मिडिल स्कूल असना में महज 14 […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

दुमका: दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के बूथ नंबर 100 प्राइमरी स्कूल जामकांदर एवं बूथ नंबर 101 अपग्रेडेड मिडिल स्कूल असना में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुनर्मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. बूथ नंबर 100 प्राइमरी स्कूल जामकांदर में 39 प्रतिशत मतदाताओं ने एवं बूथ नंबर 101 अपग्रेडेड मिडिल स्कूल असना में महज 14 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

शिकारीपाड़ा प्रखंड के बूथ नंबर 100 प्राइमरी स्कूल जामकांदर में कुल 784 मतदाता थे, जबकि बूथ नंबर 101 अपग्रेडेड मिडिल स्कूल असना में मतदाताओं की कुल संख्या 852 थी. उग्रवादी घटना के खौफ का असर खूब दिखा और लोग सहमे-सहमे मतदान केंद्र तक पहुंचे.

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव कार्य संपन्न कराने के लिए एसएसबी एवं झारखंड जगुवार की कंपनी तैनात की गयी थी. 24 अप्रैल को भी इन बूथों में शांतिपूर्ण ढंग से मतदान हुआ था, लेकिन इवीएम लेकर लौट रही पोलिंग पार्टी एवं सुरक्षाकर्मियों से भरी बस को भाकपा माओवादियों ने लैंड माइंस विस्फोट कर उड़ा दिया था. इस हादसे में पांच पुलिसकर्मी तथा तीन मतदानकर्मी शहीद हो गये थे, जबकि 11 अन्य घायल हो गये थे. इवीएम नष्ट हो जाने से पुनर्मतदान कराना पड़ा.

इवीएम लेकर आठ किलोमीटर तक पैदल चले
पुनर्मतदान के दौरान वाहन का उपयोग बहुत कम हो रहा था. जवान पैदल की गश्त लगा रहे थे. यही नहीं मतदान के बाद मतदानकर्मी भारी सुरक्षा के बीच आठ किलोमीटर तक पैदल ही इवीएम को लेकर सेक्टर तक पहुंचे. जब नक्सल प्रभावित क्षेत्र समाप्त हो गया, तब वाहन से इवीएम को दुमका स्थित स्ट्रॉग रूम लाया गया.

चप्पे-चप्पे पर दिख रहे थे एसएसबी व जगुआर के जवान
दुमका जिला के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के जामकांदर एवं असना के बूथों में पुनर्मतदान को लेकर पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गयी थी. एसएसबी एवं झारखंड जगुआर के जवान न सिर्फ जगह-जगह गश्त लगाते नजर आये, बल्कि मतदान केंद्र और मतदान केंद्र के बाहर भी इस तरह पैनी नजर रखे हुए थे की परिंदा भी पर न मार सके. पुलिस प्रशासन पिछली बार 24 अप्रैल की हुई चूक से पूरी तरह चौकन्ना था और किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए कड़े दिशा निर्देशों का अनुपालन करा रहा था.

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