रांची : एचइसी के नये निदेशक (कार्मिक) मृदुल कुमार सक्सेना ने कहा कि एचइसी में स्किल्ड मैन पावर की कमी है. इसे पूरा करने के लिए प्रबंधन ने सक्सेशन प्लानिंग शुरू किया है. इसके तहत सेवानिवृत्त हो रहे स्किल्ड कर्मियों को रिटेंशन पर रखा जा रहा है, जो कर्मियों को दक्ष बनायेंगे. इससे कार्य निर्बाध गति से चलेगा. श्री सक्सेना मंगलवार को ‘प्रभात खबर’ के साथ विशेष बातचीत कर रहे थे.
श्री सक्सेना ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में उनकी प्राथमिकता पेंडिंग कार्य को जल्द पूरा कर डिस्पैच कराना है. जिस प्लांट में मशीनें पुरानी होने के करण या अन्य कारणाें से प्रोडक्शन साइकिल धीमी है, उसमें तेजी लाना है.
इसे अलावा दुकानों व आवासों के लीज नवीनीकरण कर एचइसी को वित्त लाभ अर्जित कराना है. उन्होंने कहा कि आवासीय परिसर में अवैध निर्माण करनेवाले लोगों पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए योजना बनायी जायेगी. एचइसी कर्मी हो या सेवानिवृत्त कर्मी, जिसने भी अवैध निर्माण किया है, उन्हें एलटीएल स्कीम के तहत दिये गये आवास के तहत निर्धारित नियम का पालन करना होगा.
एचइसी के पुराने दिन वापस लाने की कोशिश करूंगा
श्री सक्सेना ने कहा कि वह एमटीएनएल में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत थे. उन्होंने एचइसी के बारे में बहुत कुछ पढ़ा व लोगों से जाना है. उनका प्रयास होगा कि एचइसी के पुराने दिन फिर से वापस लाना व लाभ में लाना है. घाटे में चल रही एचइसी में योगदान देने के सवाल पर कहा कि यहां बहुत कुछ करने की संभावना है, जिससे यह मातृ उद्योग देश-विदेश में फिर से परचम लहरा सके.
एचइसी की खस्ता हाल की वजह के सवाल पर कहा कि एचइसी के स्थापना के समय 24 हजार से अधिक कर्मी थे. तत्कालीन प्रबंधन ने मैन पावर को कम करने के लिए वीआरएस लागू किया. इससे जितने भी दक्ष कर्मी व अधिकारी थे, वह चले गये और इसका असर उत्पादन पर पड़ा. प्लांटों का आधुनिकीकरण समय पर नहीं होना भी एक कारण है. श्री सक्सेना ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में प्लांटों का आधुनिकीण फेज वाइज होगा इससे उत्पादन बढ़ेगा.