प्रस्तावित लघु खनिज नीति मामले में सरकार स्टेटस रिपोर्ट दायर करे
मामले की अगली सुनवाई छह फरवरी को होगी रांची : झारखंड हाइकोर्ट में सोमवार को पहाड़ों केे गायब होने व अवैध उत्खनन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को शीघ्र लघु खनिज नीति बनाने का निर्देश दिया. […]
मामले की अगली सुनवाई छह फरवरी को होगी
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में सोमवार को पहाड़ों केे गायब होने व अवैध उत्खनन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को शीघ्र लघु खनिज नीति बनाने का निर्देश दिया.
पूछा कि अवैध खनन को रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गयी है. उसकी क्या स्थिति है. खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने राज्य सरकार के खान-भूतत्व विभाग तथा वन विभाग को केंद्रीय वन आैर पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखने का निर्देश दिया. वहीं केंद्रीय वन मंत्रालय से जानना चाहा कि वह यह बताये कि उसके स्तर पर क्या गाइडलाइन तय करने की जरूरत है. यदि जरूरी है, तो गाइडलाइन कितने समय में बन जायेगी. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए छह फरवरी की तिथि निर्धारित की.
इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने खंडपीठ को बताया कि खनिजों के सर्वे के लिए समिति में विशेषज्ञों की नियुक्ति व एक जिला की समिति में एक ही विशेषज्ञ की नियुक्ति पर आयुक्त निर्णय लेंगे. जिला सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) के गाइडलाइन के विषय में महाधिवक्ता ने बताया कि इस पर केंद्र सरकार के वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्णय लिया जाना उचित होगा.
एमीकस क्यूरी अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने राज्य सरकार की दलील का समर्थन किया. उल्लेखनीय है कि पहाड़ों के गायब होने व अवैध उत्खनन को लेकर प्रभात खबर में प्रकाशित खबर को हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
