रांची : हाइटेंशन इंसुलेटर कारखाना को 35 साल बाद मिला जमीन का पैसा

राहत. 1982-83 में इएसआइ अस्पताल को दी गयी थी जमीन रांची : हाइटेंशन इंसुलेटर कारखाना, सामलौंग को झारखंड सरकार से करीब 35 वर्षों बाद उसकी जमीन का पैसा मिला है. वर्ष 1982-83 में ही पुराने नामकुम थाने के सामने स्थित हाइटेंशन की जमीन इएसआइ अस्पताल को दी गयी थी. पर इसके एवज में कारखाना प्रबंधक […]

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राहत. 1982-83 में इएसआइ अस्पताल को दी गयी थी जमीन
रांची : हाइटेंशन इंसुलेटर कारखाना, सामलौंग को झारखंड सरकार से करीब 35 वर्षों बाद उसकी जमीन का पैसा मिला है. वर्ष 1982-83 में ही पुराने नामकुम थाने के सामने स्थित हाइटेंशन की जमीन इएसआइ अस्पताल को दी गयी थी. पर इसके एवज में कारखाना प्रबंधक को करीब डेढ़ माह पहले 29 दिसंबर 2017 को भुगतान किया गया है.
राज्य सरकार ने कारखाने को फिलहाल 8.63 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है, जो जमीन की कुल लागत से करीब पांच करोड़ कम है. कारखाने के प्रभारी महाप्रबंधक एके राय के अनुसार इतने वर्षों के दौरान भुगतान के लिए पत्राचार होता रहा था. कुल जमीन में से सवा दो एकड़ जमीन बाद में दी गयी थी.
रकबा को लेकर भी कुछ विवाद था. इसलिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. दरअसल बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के अधीन झारखंड में कई कारखाने हैं. दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों व देनदारियों का बंटवारा न हो पाने के कारण ये कारखाने अाज भी बिहार सरकार की संपत्ति हैं. इनमें हाइटेंशन के अलावा इसी कैंपस में स्थित मैलुबल कास्ट आयरन लिमिटेड तथा हाइटेंशन के सामने स्थित स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना, इइएफ टाटीसिलवे तथा सिंदरी स्थित खाद (सुपर फॉस्फेट) कारखाना शामिल हैं. हाइटेंशन व मैलुबल कास्ट का करीब 25 एकड़ का पूरा कैंपस बिहार सरकार ने 33 वर्षों के लिए निजी पार्टी को लीज पर दे दिया है.
सरकार से पहले ही मांगा है 250 करोड़
हाइटेंशन प्रबंधन ने झारखंड सरकार से अपनी करीब 48 एकड़ भूमि के एवज में 250 करोड़ रुपये की मांग पहले ही की है. कारखाना प्रबंधन के अनुसार 15 एकड़ जमीन सब स्टेशन व ग्रिड में चली गयी. वहीं, कई एकड़ जमीन बिजली के टावर लगने व अंडर ग्राउंड इलेक्ट्रिक केबल लगाने से उपयोग लायक नहीं रह गयी है.
कर्मचारी राज्य बीमा (इएसआइ) अस्पताल के लिए भी हाइटेंशन ने करीब 8.1 एकड़ जमीन झारखंड सरकार को दी थी. इसका अब भी करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है. हालांकि, नामकुम का रेल ओवर ब्रिज के पहुंच पथ बनाने में भी हाइटेंशन की लगभग 12 एकड़ जमीन गयी थी. इसके एवज में हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने हाइटेंशन को नौ करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है.
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