स्वर्ग सं सुंदर अपन मिथिला धाम

संस्कृति. मिथिला मंच के तीन दिवसीय कार्यक्रम मिथिला महोत्सव का समापन मैथिली चुटकुले व किस्सा सुना कर लोटपोट हुए लोग बच्ची अनन्या ने भरत नाट्यम पेश किया रांची : माधव हम परिणाम निराशा तोहे जगतारण दिनदया अतै तोहर विश्वासा…, जुल्फ वाली कनियां…, ई जुनि पुछू आहां बिना… सहित अन्य गीतों को गाकर पोर्ट ऑफ स्पेन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

संस्कृति. मिथिला मंच के तीन दिवसीय कार्यक्रम मिथिला महोत्सव का समापन

मैथिली चुटकुले व किस्सा सुना कर लोटपोट हुए लोग
बच्ची अनन्या ने भरत नाट्यम पेश किया
रांची : माधव हम परिणाम निराशा तोहे जगतारण दिनदया अतै तोहर विश्वासा…, जुल्फ वाली कनियां…, ई जुनि पुछू आहां बिना… सहित अन्य गीतों को गाकर पोर्ट ऑफ स्पेन से आये पंडित हरिनाथ झा ने लोगों की खूब वाहवाही लूटी. झारखंड मिथिला मंच की ओर से आयोजित तीन दिवसीय मिथिला महोत्सव का शनिवार को समापन हो गया. इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों की ओर से गोसाउनिक गीत जय-जय भैरव असुर भयावउनी…, इसके बाद बच्ची अनन्या ने भरत नाट्यम पेश किया. जिसे लोगों ने काफी सराहा.
इसके बाद हेलो मिथिला टीम की ओर से आज जनकपुर मंगल चहु दिस मंगल हे….पेश किया. ैथिली ठाकुर ने किशोरी जी के रहल बजेबै हे हम मिथिले में रहबै…, माई जोगिया ठाढ़ अंगना में…, उगना रे मोर कतये गेला…, मोरा अंगना में उगि गैले सखी ऐला पिया मोर प्राण रे…. सहित अन्य गीत प्रस्तुत कर लोगों की खूब वाहवाही लूटी.
पूनम मिश्र, जूली झा सहित अन्य कलाकारों ने गीत पेश कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया. वहीं, माधव राय ने घूमी एलौ नगर शहरिया घुमलौ चारू धाम, स्वर्ग सं सुंदर यौ भैया अपन मिथिला धाम के अलावा दिल में बसलौं अहां धड़कन में बसा लिय, आहां रानी छी हमर राजा बना लिय… गीत प्रस्तुत किया. सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन राम सेवक ठाकुर ने किया. उन्होंने कार्यक्रम के बीच-बीच में अपने मैथिली चुटकुले व किस्सा सुना कर लोगों को खूब लोट-पोट किया. वहीं लोक कलाकारों ने जट-जटिन, झिझिया पेश किया.
कार्यक्रम का आनंद लेने के लिए काफी संख्या में मैथिली भाषा-भाषी लोगों के अलावा अन्य समाज के लोग आये थे. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एएन झा, अविनाश कुमार, अजयानंद झा पंकज, कार्यक्रम में अध्यक्ष श्रीपाल झा, संतोष झा, मनोज मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित थे. कार्यक्रम के दौरान लोगों ने मिथिला व्यंजन का जमकर लुत्फ उठाया. लोगों ने मछली-भात, चूरा-मछली, कचरी-मूढ़ी, कचरी-चूरा, मखान की खीर का लुत्फ उठाया. वहीं, अदौरी, दनौरी, सुखौटा, मैथिली फिल्म की सीडी, गाना की सीडी और मैथिली साहित्य की खरीदारी की.
लोक कलाकारों ने जट-जटिन, झिझिया पेश किया, गीतों के ग्रामीण रंग पर झूमे लोग
मिथिलांचल के गीतों को बहुत ऊंचाइयों तक ले जाने का मन है : मैथिली ठाकुर
मैथिली गीतों को बहुत ऊंचाइयों तक ले जाने का मन है. मैथिली गीतों को सुनने वाले काफी श्रोता हैं अौर सभी कलाकारों को काफी सम्मान देते हैं. यह बातें कलर्स चैनल का लोकप्रिय शो राइजिंग स्टार की उपविजेता रह चुकी मैथिली ठाकुर ने कही. उसने कहा कि वह संगीत के क्षेत्र में ही अपना कैरियर बनाना चाहती है. दिल्ली से प्लस टू की पढ़ाई करने के बाद मैथिली व संगीत में स्नातक करने के लिए पटना आऊंगी और वहां से उच्च शिक्षा लेने के बाद अपना कैरियर इसी क्षेत्र में बनाऊंगी.
उसने कहा कि रांची में मैं तीसरी बार आयी हूं. यहां हमारे गीत के काफी दीवाने हैं. उसने कहा कि एक साल तक उसका अनुबंध कलर्स चैनल के साथ है. यह पूरा होने के बाद एलबम निकालने के बारे में सोचूंगी. मैथिली ने कहा कि वह मैथिली के अलावा हिंदी में प्ले बैक सिंगर बनना चाहती है. अच्छे गायक बनने के लिए चार-पांच घंटे नियमित रियाज की जरूरत है. यह क्षेत्र नये कलाकारों के लिए भी है, जहां वे कठोर परिश्रम की बदौलत अपनी पहचान बना सकते हैं.
विदेश के लोगों में शास्त्रीय संगीत सुनने की ज्यादा रुचि : हरिनाथ झा
यहां के लोगों से अधिक विदेश के लोगों में शास्त्रीय संगीत सुनने की रुचि है. वहां इसे सुनने के लिए लोग दूर-दूर से चले आते हैं, जबकि यहां ऐसी चीजें देखने को नहीं मिलती हैं. यह बातें पोर्ट अॉफ स्पेन से आये ध्रुपद गायक पंडित हरिनाथ झा ने रांची में मिथिला मंच की अोर से आयोजित मैथिली महोत्सव में विशेष बातचीत के दौरान कही. उनकी पहचान एक अच्छे ध्रुपद गायक के रूप में है. उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत के प्रति यहां के लोगों का रवैया सही नहीं है,
जबकि विदेशों में ऐसी बातें नहीं हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संगीत चले तो बेहतर है. विदेशों में लोग प्राइमरी समय में अपने बच्चों को संगीत सिखाते हैं, जबकि भारत में लोग इसे सेकेंडरी मान कर सिखाते हैं. उन्होंने कहा कि अच्छे गायक बनने के लिए अच्छी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे योगी बनने की भी जरूरत है, क्योंकि संगीत रियाज की चीज है. रियाज के लिए काफी वक्त देने की जरूरत पड़ती है, तब आप जाकर एक अच्छे कलाकार बन सकते हैं अौर अपनी पहचान बना सकते हैं.
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