हिटलरशाही कर रही हैं मेयर

नगर निगम में चल रही खींचतान चरम पर पहुंची, पार्षदों ने कहा मेयर द्वारा नोटिस दिये जाने से नाराज 33 पार्षदों ने नगर निगम सभागार में की बैठक कहा : हम भी चुनाव जीत कर आये हैं, मेयर को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं रांची : रांची नगर निगम के पार्षद बोर्ड की विशेष […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

नगर निगम में चल रही खींचतान चरम पर पहुंची, पार्षदों ने कहा

मेयर द्वारा नोटिस दिये जाने से नाराज 33 पार्षदों ने नगर निगम सभागार में की बैठक
कहा : हम भी चुनाव जीत कर आये हैं, मेयर को नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं
रांची : रांची नगर निगम के पार्षद बोर्ड की विशेष बैठक बुलाने और कार्यालय अधीक्षक को सेवा विस्तार देने की मांग कर रहे थे. इसके लिए पार्षदों ने नगर निगम कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी भी दी थी. इस पर मेयर आशा लकड़ा ने पार्षदों को सोमवार को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा था. नोटिस से नाराज पार्षदों ने मंगलवार को निगम सभाकक्ष में बैठक कर मेयर को सवालों के घेरे में खड़ा किया.
पार्षदों ने कहा कि क्या बोर्ड की विशेष बैठक बुलाने की मांग करना नगरपालिका अधिनियम का उल्लंघन है? अगर नहीं, तो मेयर को नोटिस जारी करने का अधिकार किसने दिया? मेयर नगर निगम में हिटलरशाही करना चाहती हैं. क्यों नहीं मेयर के ही इस रुख को नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन माना जाये?
सेवा विस्तार पर पार्षदों
ने उठाये सवाल
पार्षदों ने कहा कि नगर निगम में पूर्व से ही सेवा विस्तार देने का कार्य चल रहा है. इसी के तहत सुबोध सिन्हा, एसके ठाकुर, मणि गोपाल राहा सहित कई कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक्सटेंशन पर रखा गया. ऐसे में जब सभी पार्षद कार्यालय अधीक्षक को सेवा विस्तार देने पर सहमत हैं, तो मेयर को इस पर आपत्ति क्यों है? कहीं इसके पीछे आपका निजी कारण तो नहीं है? पार्षदाें ने यह भी सवाल उठाया कि अब तक जिन 15 कर्मचारियों काे मेयर द्वारा सेवा विस्तार दिया गया है, क्यों नहीं इन कर्मचारियों को दिये गये वेतन की राशि आपसे वसूली की जाये? साथ ही गैर कानूनी एजेंडा पास कराने के एवज में आप पर कानूनी कार्रवाई हो.
कानून की धज्जियां उड़ा रहीं मेयर
मेयर के नोटिस के जवाब में पार्षदों ने कहा है कि सभी वार्ड पार्षद चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं. उन्हें नगरपालिका अधिनियम का ज्ञान है. इसी अधिनियम के तहत हम चुनकर आये हैं. शायद आपको इसका ज्ञान नहीं है. इसलिए आप इस अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए निगम में काम कर रहे हैं.
बैठक में ये पार्षद रहे उपस्थित
वेद प्रकाश सिंह, रोशनी खलखो, अर्जुन राम, उर्मिला यादव, बसंती लकड़ा, सुजाता कच्छप, सविता कुजूर, गायत्री देवी, विजय लक्ष्मी सोनी, पुष्पा टोप्पो, सोनी परवीन, शबाना खान, प्रीति रंजन, जमीला खातून, विनोद सिंह, मो एहतेशाम, अर्जुन यादव, अरुण झा, आनंद मूर्ति, दीपक लोहरा, अशोक यादव, सुचिता रानी राय, हुस्ना आरा, नाजिमा रजा, साजदा खातून, सुनील यादव, रश्मि चौधरी, नसीम गद्दी, जेरमिन कुजूर, ओमप्रकाश, नकुल तिर्की आदि.
पार्षदों के आरोप पर मेयर ने दिया जवाब
पार्षदों द्वारा लगाये आरोप पर मंगलवार को मेयर आशा लकड़ा ने पत्र के माध्यम से जवाब दिया है. मेयर ने कहा कि निगम बोर्ड में आनेवाले किसी भी एजेंडा पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मेयर का है. निगम से मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए कार्यालय अधीक्षक नरेश सिन्हा ने कैसे पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सेवा विस्तार देने का एजेंडा बोर्ड की प्रोसेडिंग फाइल में जोड़कर आगे बढ़ाया, यह जांच का विषय है. मेयर ने कहा कि एजेंडा में अजय कुमार सहाय को संविदा अवधि विस्तार लिखकर भेजा गया था. इसलिए उसे बोर्ड में लाने की मंजूरी दी गयी. इसके अलावा अन्य तीन सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कार्य विस्तार होने से रोका गया. मेयर ने कहा कि उन्हें पहले अधिनियम की जानकारी नहीं थी, इसलिए जानकारी के अभाव में लोगों को सेवा विस्तार दिया गया. अब उन्हें अधिनियम की जानकारी हो गयी है. जानकारी होने के बाद उन्होंने आठ मई 2018 को ही नगर आयुक्त को पत्र लिखकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं देने का आदेश दिया.
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