रांची : अस्तित्व बचाने की अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं हाथी : सिंह

रांची : वन्य प्राणी प्रभाग झारखंड द्वारा वन विभाग के पलास ऑडिटोरियम में एक सादे समारोह में रविवार को विश्व हाथी दिवस मनाया गया. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी एवं मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक) एलआर सिंह ने बताया कि हाथी हमारे इको सिस्टम का एक अभिन्न अंग हैं. इसका संरक्षण आवश्यक है. आइयूसीएन की […]

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रांची : वन्य प्राणी प्रभाग झारखंड द्वारा वन विभाग के पलास ऑडिटोरियम में एक सादे समारोह में रविवार को विश्व हाथी दिवस मनाया गया. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी एवं मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक) एलआर सिंह ने बताया कि हाथी हमारे इको सिस्टम का एक अभिन्न अंग हैं.
इसका संरक्षण आवश्यक है. आइयूसीएन की सूची में भारतीय हाथी लुप्त प्राय वन्य प्राणियों की श्रेणी में आते हैं. भारतीय वन अधिनियम के शेड्यूल-एक में इसे रखा गया है. हाथियों का अस्तित्व इसलिए खतरे में है क्योंकि वन काटे जा रहे हैं. वनों की सघनता में कमी हो रही है.
हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग में कई ऐसी विकास योजनाएं एवं संरचनाएं निर्मित की गयी हैं, जिससे उनका पारंपरिक रास्ता बाधित हो रहा है. श्री सिंह ने कहा कि मानव हाथी द्वंद का मुख्य कारण जंगलों पर बढ़ता हुआ मानवीय दवाब है. जिसके कारण भोजन, भूमि एवं शरण के लिए पर्याप्त स्थान की कमी के कारण मानव एवं हाथी आपस में प्रतियोगी हो गए हैं. जंगली हाथी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं.
जल्द सूचना अपलोड करें अधिकारी
श्री सिंह ने बताया कि कंपेनसेशन मैनेजमेंट सिस्टम की शुरुआत की गयी है. सभी वन पदाधिकारियों को जंगली जानवरों से होनेवाली क्षति का भी परिणाम तत्काल इस ऑनलाइन एप्लीकेशन के माध्यम से अपलोड करने का निर्देश दिया गया है. इससे हाथी प्रभावित लोगों को क्षतिपूर्ति का भुगतान समय पर किया जा सके. इसमें सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी, वन्य प्राणी प्रमंडलों के वन प्रमंडल पदाधिकारी एवं प्रादेशिक प्रमंडलों के वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों ने हिस्सा लिया.
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