श्रद्धांजलि देने पक्ष या विपक्ष के कोई नेता व अफसर घाट या घर पर नहीं पहुंचे
रांची : सेकेंड वर्ल्ड वार के सेनानी वेद नारायण गौड़(105 वर्ष) का अंतिम संस्कार हरमू मुक्ति धाम में हुआ़ उनके बड़े पुत्र अशोक गौड़ ने मुखाग्नि दी़ वह पूरे विश्व में सेकेंड वर्ल्ड वार के एक मात्र योद्धा थे, जो जीवित थे और सोमवार को उनका निधन हुआ़
मंगलवार को बरियातू के हरिहर सिंह रोड से उनकी अंतिम यात्रा निकली़ अधिवक्ता प्रणव कुमार बब्बु ने कहा यह विडंबना ही है कि अंतिम संस्कार में मात्र 17 लोग घाट पर पहुंचे़ विश्व युद्ध के याेद्धा को श्रद्धांजलि देने पक्ष या विपक्ष का कोई भी नेता या अफसर घाट या उनके घर पर नहीं पहुंचा़ इधर, जानकारी मिलने पर मुहल्ले व अासपास के महिला-पुरुष सहित काफी लोग अंतिम यात्रा के पूर्व वेद नारायण गौड़ के आवास पर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे़
पत्रकारिता से की कैरियर की शुरुआत
प्रवण कुमार बब्बु ने बताया कि उन्हाेंने अपनी कैरियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी़ वे इंडियन नेशन अखबार में उर्दू को इंग्लिश में ट्रांसलेट करते थे़
उसके बाद अंग्रेज सरकार मेें उनकी नौकरी डिप्टी कलेक्टर के रूप में हो गयी़ बाद में डिपूटेशन पर सेना में लेफ्टिनेंट बना कर भेज दिया गया़ सेकेंड वर्ल्ड वार में चटगांव (अब बंगला देश में) में आर्टिलरी इंचार्ज के रूप में युद्ध स्थल पर थे़ सेना के गोला बारुद की देखरेख वेद नारायण गौड़ ही कर रहे थे़
उनकी पुत्र वधु कुमकुम गौड़ टीवी व नाटक की प्रसिद्ध कलाकार हैं. उनका छोटा पुत्र डॉ आलोक गौड़ का रामगढ़ में क्लिनिक है़, जबकि उनकी पुत्री स्मिता नारायण हैं. वह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं.
उनके अंतिम संस्कार में इनटी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ राघव शरण, अधिवक्ता प्रणव कुमार बब्बू, संजय अंबष्ठ, विकास कुमार सिन्हा, सीपीआइ नेता अजय कुमार, अनुज तिवारी, मुकेश कुमार, मधु सिन्हा व परिवार के लोग उपस्थित थे़