रांची : भाजपा की सरकार रही, तो किताबों में ही दिखेंगे आदिवासी : बाबूलाल मरांडी

हरमू मैदान में झारखंड विकास मोर्चा का आदिवासी महासम्मेलन रांची : झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंडी समाजपरिवर्तन की प्रतीक्षा कर रहा है़ यह प्रदेश बना है, तो इसके लिए आदिवासियों ने अग्रिम पंक्ति में रह कर लड़ाई लड़ी, जिसमें हजारों शहीद हुए. पर इस राज्य से कोई सबसे अधिक उजाड़े […]

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हरमू मैदान में झारखंड विकास मोर्चा का आदिवासी महासम्मेलन
रांची : झाविमो के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंडी समाजपरिवर्तन की प्रतीक्षा कर रहा है़ यह प्रदेश बना है, तो इसके लिए आदिवासियों ने अग्रिम पंक्ति में रह कर लड़ाई लड़ी, जिसमें हजारों शहीद हुए. पर इस राज्य से कोई सबसे अधिक उजाड़े गये, तो वे आदिवासी है़ं
रघुवर दास की सरकार बनने के बाद सीएनटी, एसपीटी एक्ट व भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन, गैर मजरूआ जमीन की जमाबंदी रद्द कर उसे लैंड बैंक में हस्तांतरण कर काॅरपोरेट घरानों को देने की तैयारी है़ यदि भाजपा की सरकार रही, तो दस -बीस वर्षोंं में झारखंड में आदिवासी कहीं दिखायी नहीं देंगे़ सिर्फ एंथ्रोपोलॉजी की किताबों में ही वे नजर आयेंगे़ वे रविवार को हरमू मैदान में झाविमो द्वारा आयोजित आदिवासी महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे़
उन्होंने कहा कि आजादी के 70 वर्षों में सरकार ने विकास के नाम पर 30 लाख एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की है़ उस जमीन पर कारखाने, खदान, डैम परियोजनाएं बनीं. इससे हजारों गांव और लाखों लोग उजड़ गये हैं. राज्य गठन के बाद भी उन्हें न्याय देने की जगह आज सरकार पहले से भी तीव्र गति से उन्हें उजाड़ने का अभियान चला रही है़
खनिज का स्वामित्व देंगे : श्री मरांडी ने कहा कि उनकी सरकार में आदिवासियों का विकास प्राथमिकता सूची में था़ बेरोजगार युवाओं के बीच बसों का वितरण, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, हाट-बाजार, बालू- घाट की व्यवस्था जैसी योजनाएं बनायी गयी. बीजेपी की सरकार ने उन सारी कोशिशों को समाप्त कर दिया़ सरकार को बच्चों की पढ़ाई की चिंता नहीं, जमीन लेने की चिंता ज्यादा है़
एचइसी बंदी के कगार पर है, होटवार पशुपालन केंद्र बंद हो गया. झाविमो को अवसर मिला, तो खनिज का स्वामित्व भी यहां के लोगों को मिलेगा़ यदि झारखंड में किसी ने आदिवासियों को जुबान दिया है, वे पढ़-लिख कर खड़े हुए हैं, तो यह मिशनरियों की बदौलत है़ न्याय के लिए सदन, सड़क पर आंदोलन के साथ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाने की जरूरत है़
जो आदिवासी हित में काम करेगा, वहीं झारखंड पर राज करेगा : झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जो आदिवासी हित की बात करेगा, वही झारखंड पर राज करेगा़ झारखंड विकास मोर्चा ने शुरुआत से झारखंडियों, आदिवासियों के हित में ईमानदार से लड़ाई लड़ी है़ जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में रघुवर दास की सरकार बनी है, तब से आदिवासियों का शोषण शुरू हुआ है़
यह राज्य झारखंडियों से चलेगा, बाहरियों से नहीं : सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री सह झविमो महासचिव बंधु तिर्की ने कहा कि यह राज्य झारखंडियों से चलेगा, बाहरियों से नही़ं
जो हमारी परंपराओं, रीति-रिवाजों को नहीं समझता, वह इसे नहीं चला सकता. महासम्मेलन को सुदेश्वर मुंडा, सुनील उरांव, शिव उरांव, दीपा मिंज, पंचू मिंज, वीरेंद्र हंसदा, डॉ असरीता कुजूर, बलकू उरांव ने भी संबोधित किया़ मौके पर डॉ अमित मुंडा, जगदीश लोहरा, धर्मगुरु वीरेंद्र भगत, शिवा कच्छप आदि मौजूद थे़
झारखंडियों को शत-प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की गयी
महासम्मेलन में सरना कोड लागू करने, आदिवासियों की हड़पी जमीन वापस करने, राज्य गठन के बाद से टीएसपी राशि का हिसाब देने, विकास के नाम पर आदिवासियों को जमीन से बेदखल करना बंद करने, लैंड बैंक के नाम पर आदिवासी जमीन की लूट बंद करने, आदिवासी परंपराओं व संस्कृति से खिलवाड़ बंद करने, आदिवासियों के धार्मिक स्थल को चिह्नित कर उसे संरक्षित करने व आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में कटौती बंद करने समेत कई मांगें की गयीं.
इसके अलावा जर्जर आदिवासी छात्रावासों का जीर्णोद्धार करने, आदिवासी विद्यार्थियों का छात्रावास खाली कराने का निर्देश निरस्त करने, राज्य के सभी वर्ग की नौकरियों में झारखंडियों को शत-प्रतिशत आरक्षण देने, आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई-लिखाई की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने, वर्तमान स्थानीयता नीति को रद्द करने, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का मर्जर (विलय) बंद करने, भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून वापस लेने के अलावा सीएनटी, एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ नहीं करने की भी मांग की गयी.
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