रांची : केवीके में नियुक्ति के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी नहीं
रांची : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक सह भारत सरकार के कृषि शिक्षा विभाग के सचिव डॉ त्रिलोचन महापात्र ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों में नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुमति की जरूरत नहीं है. केवीके में काम करनेवालों के लिए पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है. इसके लिए […]
रांची : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक सह भारत सरकार के कृषि शिक्षा विभाग के सचिव डॉ त्रिलोचन महापात्र ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों में नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से अनुमति की जरूरत नहीं है. केवीके में काम करनेवालों के लिए पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है. इसके लिए किसी के ऊपर निर्भर होने की जरूरत नहीं है. विवि अपने स्तर से नियुक्ति कर सकता है.
राज्य सरकार से इसको लेकर अगर कोई गतिरोध है, तो बात करनी चाहिए. इसमें आइसीएआर भी सहयोग करेगा. डॉ महापात्र ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के संचालन के लिए शोध, प्रचार, शिक्षा के लिए मैनपावर जरूरी है.
इसके बिना शैक्षणिक संस्थान नहीं चल सकता है. बीएयू को संस्थान के सफल संचालन के लिए मैन पावर कमी को दूर करना चाहिए. इसको लेकर राज्यपाल भी गंभीर हैं. उन्होंने भी यह मुद्दा उठाया है. डॉ महापात्र ने कहा कि राज्य में गेहूं उत्पादन की स्थिति अच्छी नहीं है. राष्ट्रीय औसत 3.2 टन प्रति हेक्टेयर है, इसकी तुलना में 2.2 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन झारखंड में हो रहा है. इसको बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को सिंचाई की सुविधा बढ़ानी चाहिए.
पांच-पांच गांवों में दोगुनी करेंगे किसानों की आय : डॉ महापात्र ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने का निर्देश दिया है. इसके लिए काम हो रहा है.
आइसीएआर ने तय किया है कि पांच-पांच गांवों को गोद लेकर वहां के किसानों की आय को दोगुनी करने का मॉडल तैयार होगा. इसको देख कर राज्य सरकार और अन्य एजेंसियों को आगे आना होगा. इसके लिए बाजार उपलब्ध कराना, प्रोसेसिंग आदि महत्वपूर्ण है.
