स्मार्ट ग्राम योजना में झारखंड पिछड़ा, केंद्र ने जताया असंतोष
रांची : स्मार्ट ग्राम बनाने की योजना में झारखंड काफी पीछे चल रहा है. दो साल में यहां एक भी गांव को स्मार्ट ग्राम में तब्दील नहीं किया जा सका. समीक्षा में पाया गया कि स्मार्ट ग्राम योजना की प्रगति भी काफी धीमी है. केंद्र सरकार ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव ने झारखंड को पत्र लिख कर यहां के काम के प्रति असंतोष व्यक्त किया है. केंद्र ने लिखा है कि अगर समय पर यहां काम होता और स्मार्ट ग्राम बनते, तो बड़ी राशि का निवेश झारखंड में हो पाता. इसका असर व्यापक होता. यहां की आर्थिक गतिविधियां बढ़ती, जिसका सीधा लाभ झारखंड और यहां के लोगों को मिलता. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के तहत गांवों को स्मार्ट ग्राम बनाना था.
यह केंद्र प्रायोजित योजना है. योजना के तहत दो साल पहले गांवों का चयन तो हुआ था, लेकिन स्मार्ट ग्राम की परिकल्पना में झारखंड को सफलता नहीं मिली. हालांकि, केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में तीन चरणों में 15 जिलों के 15 कलस्टर को मंजूरी दे दी थी. केंद्र की मंजूरी के बाद इन गांवों में शहर की तरह सुविधाएं तो उपलब्ध करानी थी, लेकिन उसके वास्तविक स्वरूप में बदलाव नहीं करना था.