रांची : 500 फीट से ज्यादा बोरिंग कराने पर पानी की संभावना कम : टीबीएन सिंह

रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर आइइआइ ने आयोजित किया सेमिनार रांची : सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के वरीय हाइड्रोलॉजिस्ट टीबीएन सिंह का कहना है कि राजधानी में अगर 200 से 500 फीट तक पानी नहीं मिले, तो और गहरी बोरिंग न करायें. इसमें पानी निकलने की संभावना कम होती है. सामान्य तौर पर देखा गया है […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 22, 2018 8:54 AM
रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर आइइआइ ने आयोजित किया सेमिनार
रांची : सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के वरीय हाइड्रोलॉजिस्ट टीबीएन सिंह का कहना है कि राजधानी में अगर 200 से 500 फीट तक पानी नहीं मिले, तो और गहरी बोरिंग न करायें. इसमें पानी निकलने की संभावना कम होती है.
सामान्य तौर पर देखा गया है कि राजधानी में इतनी गहराई में पानी मिल जाता है, लेकिन बोरिंग करनेवाले लोगों को बेवकूफ बनाकर और गहराई तक बोरिंग करने के लिए प्रेरित करते हैं. इससे अधिक बोरिंग दोहन के हिसाब से भी ठीक नहीं है. श्री सिंह रविवार को डोरंडा स्थित अभियंता भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (आइइआइ) द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे.
श्री सिंह ने कहा कि सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड साल में चार बार राजधानी में जल स्रोतों का अध्ययन करता है. पिछले 10 साल में चतरा, पलामू, कोडरमा, रांची और खूंटी के कई इलाकों में 10 सेमी प्रतिवर्ष की दर से जल स्तर नीचे जा रहा है. रांची के कई शहरी एरिया में तो 35 सेमी प्रतिवर्ष तक जल स्तर नीचे जा रहा है.
श्री सिंह ने कहा कि राजधानी में तालाबों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है. इसके नाम पर तालाबों की चहारदीवारी कर उसे छोटा कर दिया गया है. इसके कैचमेंट एरिया को बंद कर दिया गया है. इससे पानी तालाब में नहीं जा पायेगा. वैसे भी राजधानी में एक समय 100 से अधिक तालाब थे, अब मात्र 30-35 ही बचे हैं. तालाब वाटर रिचार्ज का बड़ा माध्यम होता है.
इससे पूर्व उदघाटन समारोह में जल संसाधन विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर एनके राय ने वाटर रिचार्ज के महत्व की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है. मौके पर विशिष्ट अतिथि पेयजल स्वच्छता विभाग के इंजीनियर शार्देंदु नारायण व बीआइटी एलम्युमिनी एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके चौधरी ने भी अपने विचार रखे. अतिथियों का स्वागत शिवानंद राय व धन्यवाद ज्ञापन एमआर कुमार ने किया.