अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के इतिहास में झारखंड पहला फोकस राज्य, फिल्म उद्योग की असीम संभावनाएं

रांची/गोवा : केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव अमित खरे ने कहा है कि झारखंड में सिनेमा उद्योग की असीम संभवानाएं हैं. फिल्म नीति निर्माण के महज कुछ दिनों के अंदर ही जिस तरह नामी फिल्मकारों और कलाकारों ने झारखंड के प्रति रुचि दिखाई है, यह काबिल-ए-तारीफ है. राज्य फिल्म नीति के निर्माण के समय वे […]

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रांची/गोवा : केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव अमित खरे ने कहा है कि झारखंड में सिनेमा उद्योग की असीम संभवानाएं हैं. फिल्म नीति निर्माण के महज कुछ दिनों के अंदर ही जिस तरह नामी फिल्मकारों और कलाकारों ने झारखंड के प्रति रुचि दिखाई है, यह काबिल-ए-तारीफ है. राज्य फिल्म नीति के निर्माण के समय वे खुद भी राज्य में तैनात थे. उनकी कोशिश थी कि नीति ज्यादा आकर्षक और रियलिस्टिक बने, जिससे राज्य में फिल्म निर्माण की प्रक्रिया तेज हो. इस दिशा में किये गये काम का असर आनेवाले दिनों में देखने को मिलेगा.
श्री खरे बुधवार को गोवा में आयोजित 49वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में झारखंड पैवेलियन के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे.उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के 49 वर्ष के इतिहास में पहली बार किसी राज्य को फोकस स्टेट का दर्जा दिया गया है. इसका बहुत ज्यादा फायदा झारखंड राज्य को होगा. देश-विदेश के नामी फिल्म निर्माता झारखंड की खूबसूरत वादियों में सिनेमा का निर्माण करें. यहां फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय हर संभव मदद देने को तैयार है. फिल्म निर्माण प्रक्रिया तेज होने से झारखंड में पर्यटन का भी विकास होगा. फिल्मों के माध्यम से इसे एक्सप्लोर करने में मदद मिलेगी. वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा.
केंद्र सरकार की कोशिश है कि पूर्वी क्षेत्र में फिल्म निर्माण की गतिविधियां तेज हो. इसी क्रम में सबसे पहले झारखंड पर फोकस किया गया. आनेवाले दिनों में बिहार, उत्तर प्रदेश और नॉर्थ ईस्ट पर भी फोकस किया जायेगा. उन्होंने उम्मीद जतायी कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में देश-विदेश के प्रतिनिधियों को झारखंड पैवेलियन के माध्यम से राज्य के बारे में बताने में आसानी होगी. निजी तौर पर भी उन्होंने झारखंड की खूबियों से लोगों को अवगत कराया है. लोग यह जानकार हैरान हैं कि यहां इतने खूबसूरत लोकेशन, बेहतर फिल्म नीति मौजूद है. श्री खरे ने कहा कि 24 नवबंर को इस मंच से झारखंड के प्रतिनिधिमंडल को भी राज्य के बारे में बताने का मौका मिलेगा. वहीं राज्य में बनी फिल्मों का प्रदर्शन होना तय है. इससे झारखंड को फिल्म निर्माण की अगुआई करनेवाले राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने में मदद मिलेगी.
श्री खरे ने बताया कि इंडियन पैनोरमा के तहत झारखंड के दो शहरों में क्षेत्रीय फिल्म फेस्टिवल कराने का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को फिल्मों को जानने-समझने का ज्यादा मौका मिलेगा.
212 फिल्मों का प्रदर्शन किया जायेगा : गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 68 से अधिक देशों के विभिन्न भाषाओं की 212 फिल्मों का प्रदर्शन किया जायेगा, जिसमें झारखंड में बनी सात फिल्में एमएसडी द अनटोल्ड स्टोरी, डेथ इन द गंज, रांची डायरी, बेगम जान, मोर गांव मोर देश, पंचलेट, अजब सिंह की गजब कहानी भी अन्य फिल्मों के साथ प्रदर्शित की जायेंगी. फिल्म महोत्सव में 24 नवंबर झारखंड दिवस के रूप में मनाया जायेगा.
रांची : गोवा के पणजी में आयोजित 49वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में झारखंड के रहनेवाले प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक अशोक शरण ने इस समारोह में ज्यूरी सदस्य की भूमिका निभाई है. इससे पहले भी श्री शरण 2006 और 2016 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के ज्यूरी सदस्य रहे हैं.
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड, मुंबई के सलाहकार और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, भारत सरकार में सलाहकार सदस्य के रूप में कार्यरत हैं. इन्होंने आदिवासी जीवन पर 150 डॉक्यूमेंटरी फिल्म और भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर फीचर फिल्म का निर्माण भी किया है और कई फिल्मों पर कार्य कर रहे हैं.
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