रांची : मोदी सरकार ने हिंदू और मुस्लिम में कोई फर्क नहीं किया : मुख्यमंत्री

कांग्रेस ने 67 साल में मुस्लिम के नाम पर केवल वोट बैंक बनाया सर्वधर्म सामूहिक विवाह में जोड़ों को दिया आशीर्वाद रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि मोदी सरकार ने हिंदू व मुस्लिम में कोई फर्क नहीं किया. सभी योजनाओं में हिंदू-मुस्लिम सबको बराबर का हक दिया, लेकिन कांग्रेस ने 67 साल […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
कांग्रेस ने 67 साल में मुस्लिम के नाम पर केवल वोट बैंक बनाया
सर्वधर्म सामूहिक विवाह में जोड़ों को दिया आशीर्वाद
रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि मोदी सरकार ने हिंदू व मुस्लिम में कोई फर्क नहीं किया. सभी योजनाओं में हिंदू-मुस्लिम सबको बराबर का हक दिया, लेकिन कांग्रेस ने 67 साल में मुस्लिम के नाम पर केवल वोट बैंक बनाया. वह सोमवार को धनबाद के गोल्फ मैदान में सर्वधर्म सामूहिक विवाह कार्यक्रम में बोल रहे थे.
उन्होंने विवाह करने वाले 84 जोड़ों को आशीर्वाद दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने गरीबों के नाम पर सिर्फ राजनीति की. चुनाव में कांग्रेस कहती है कि कांग्रेस का हाथ गरीबों के साथ. चुनाव खत्म होने के बाद गरीबों के साथ विश्वासघात करती है. 67 साल के इतिहास में कांग्रेस ने गरीबों को सिर्फ छला है, उनके लिए कुछ नहीं किया.
चाय बेचनेवाले नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने. अपनी बीती जिंदगी से सीख लेते हुए प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिए उज्ज्वला योजना, आवास योजना, गरीबों के घर-घर में शौचालय, सबके हाथों में रोजगार के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाये. वहीं, कुछ राजनीति दल सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.
24 से शुरू होगी सुकन्या योजना : मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 जनवरी से मुख्यमंत्री सुकन्या योजना शुरू होगी. इस योजना से 27 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा.
कन्यादान से पहले विद्यादान जरूरी है. लड़की के जन्म, पढ़ाई व शादी तक सरकार प्रोत्साहन राशि देगी. लड़की के जन्म लेने पर पांच हजार राशि सीधे मां के एकाउंट में चला जायेगा. कक्षा एक में दाखिला लेने पर पांच हजार की प्रोत्साहन राशि मां के एकाउंट में जायेगी. कक्षा पांच में दाखिला लेने के बाद पांच हजार, आठवीं में दाखिला लेने के बाद फिर पांच हजार, दसवीं में पांच हजार व 12 वीं पास करने पर 10 हजार राशि मां के एकाउंट में चली जायेगी.
18 साल में शादी के समय 30 हजार रुपये सरकार देगी. हमारी बेटी पढ़े, ताकि दूसरे के घर में संस्कार देने का काम करे. अगर बेटी पढ़ी-लिखी रहेगी, तो किसी तरह की समस्या आने पर उसका सामना भी कर सकती है.
झारखंड में कम उम्र में शादी जैसी कुरीतियां आज भी फैली हुई हैं. इस पर लगाम लगाने की जरूरत है. प्राय: देखा जाता है कि सातवीं व आठवीं तक आते-आते कई बच्चियां पढ़ाई छोड़ देती हैं. इस सोच को बदलने के लिए सरकार मुख्यमंत्री सुकन्या योजना लागू कर रही है.
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