रांची : खतरे में है हमारा शहर साफ करनेवालों की सेहत
अपने सफाईकर्मियों को सुरक्षा के संसाधन तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है रांची नगर निगम रांची : चार जनवरी से पूरे देश में स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 का शुभारंभ हो चुका है. राजधानी रांची को इस सर्वेक्षण में बेहतर रैंक दिलाने के लिए रांची नगर निगम ने पूरे शहर में जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिंग लगाये गये हैं. […]
अपने सफाईकर्मियों को सुरक्षा के संसाधन तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है रांची नगर निगम
रांची : चार जनवरी से पूरे देश में स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 का शुभारंभ हो चुका है. राजधानी रांची को इस सर्वेक्षण में बेहतर रैंक दिलाने के लिए रांची नगर निगम ने पूरे शहर में जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिंग लगाये गये हैं.
इसमें लोगों से शहर को स्वच्छ रखने में सहयोग की अपील की जा रही है. इस प्रचार-प्रसार में लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, शहर की सफाई में लगे कर्मचारियों को रांची नगर निगम ग्लब्स, मास्क और लांग बूट तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. ऐसे में इन सफाई कर्मचारियों पर गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है.
नाम नहीं छापने के शर्त पर रांची नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने कहा कि जब किसी बड़े पदाधिकारी के कार्यक्रम में हमें सफाई कार्य में लगाया जाता है, तो हमें ग्लब्स से लेकर मास्क तक दिये जाते हैं.
लेकिन, जब हम आम दिनों में सड़कों और मोहल्ले की सफाई के लिए जाते हैं, तो हमें किसी तरह के सेफ्टी के संसाधन नहीं दिये जाते हैं. हम खुले हाथों से ही कचरा उठाकर वाहन में लोड करते हैं. इस दौरान तरह-तरह की गंदी चीजों से हमारा संपर्क होता है. हमेशा इंफेक्शन और बीमारी का डर रहता है, लेकिन क्या करें, नौकरी का सवाल है. न चाहते हुए भी मजबूरी में हमें ये काम करना ही पड़ता है.
हर साल 250 से अधिक कर्मचारी पड़ते हैं बीमार
शहर की सफाई में लगे कर्मचारियों की मानें, तो बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सफाई करने के कारण साल में 250 से अधिक कर्मचारी बीमार पड़ते हैं. सर्दी, खांसी बुखार से तो सालों भर कर्मचारी जूझते ही रहते हैं.
कई कर्मचारी तो ऐसे भी हैं, जो छोटी-माेटी बीमारियों के लिए अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं. यही बीमारी धीरे-धीरे बड़ी होते हुए उन्हें काल के गाल में खींच ले रहे हैं. चूंकि हम गरीब हैं, इसलिए यह बोल भी नहीं पाते की बिना सुरक्षा के काम करने के कारण उसकी मौत हो गयी है.
