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रांची : विश्वविद्यालय में सेवा बहाल करने की लड़ाई 27 साल से लड़ रहे हैं कर्मचारी

कर्मियों ने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया रांची : रांची विश्वविद्यालय के कर्मचारी संतोष कुमार वर्मा व अजय प्रकाश खरे विवि में पुन: सेवा सेवा बहाल करने को लेकर वर्ष 1991 से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं. इस दौरान उन्होंने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | February 4, 2019 8:47 AM
कर्मियों ने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया
रांची : रांची विश्वविद्यालय के कर्मचारी संतोष कुमार वर्मा व अजय प्रकाश खरे विवि में पुन: सेवा सेवा बहाल करने को लेकर वर्ष 1991 से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं.
इस दौरान उन्होंने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट से नियुक्ति के आदेश के बाद भी आज तक उनकी सेवा बहाल नहीं हुई है. इस संबंध में संतोष कुमार वर्मा व अजय प्रकाश खरे ने बताया कि मामले में महाधिवक्ता की राय भी उनके पक्ष में है. दोनों कर्मियों ने न्यायालय के आदेश के बाद भी नियुक्ति नहीं होने पर इस संबंध में राजभवन में शिकायत की. राजभवन ने दोनों कर्मियों को उचित मंच पर अपनी मांग रखने के लिए कहा.
उन्होंने बताया कि रांची विवि स्वयं को पार्टी मानते हुए, उचित फोरम न होने का कारण बताते हुए, यथावत स्थिति बनाये रखने से संबंधित राज्यपाल सचिवालय के पूर्व के निर्णय का हवाला देते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. उल्लेखनीय है कि पूर्व कुलपति लाल साहब सिंह के कार्यकाल में 956 कर्मियों की नियुक्ति की गयी थी. जिन्हें बाद में तत्कालीन कुलपति अमर कुमार सिंह ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए बरखास्त कर दिया था.
इसके बाद कर्मी हाइकोर्ट व बाद में सुप्रीम कोर्ट गये. सुप्रीम कोर्ट ने कर्मियों के पक्ष में निर्णय दिया. इस मामले में राज्य सरकार ने महाधिवक्ता से भी राय ली. महाधिवक्ता ने अपनी राय में स्पष्ट रूप से कहा कि जिन कर्मचारियों का नाम याचिकाकर्ता में है, उनकी नियुक्ति स्वीकृत पद पर होनी है. दोनों कर्मियों ने बताया कि उनकी नियुक्ति इसलिए नहीं हो सकी कि विश्वविद्यालय ने स्वीकृत पदों पर उन लोगों का सेवा सामंजन कर दिया, जो याचिकाकर्ता नहीं थे.

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