रांची : एक साथ जन्मे तीन प्री-मेच्योर बच्चों की आंखों में आयी रोशनी

कश्यप मेमोरियल आइ हॉस्पिटल में हुआ ऑपरेशन रांची : कश्यप मेमोरियल अाइ हॉस्पिटल ने देवघर के जसीडीह के तीन प्री-मेच्योर (समय से पहले जन्मे) बच्चाें की आंख में रोशनी दी है. तीनों बच्चे इंदु देवी के हैं. समय से पहले जन्मे इन बच्चों का वजन कम था. जन्म के 45 दिन बाद भी बच्चों का […]

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कश्यप मेमोरियल आइ हॉस्पिटल में हुआ ऑपरेशन
रांची : कश्यप मेमोरियल अाइ हॉस्पिटल ने देवघर के जसीडीह के तीन प्री-मेच्योर (समय से पहले जन्मे) बच्चाें की आंख में रोशनी दी है. तीनों बच्चे इंदु देवी के हैं.
समय से पहले जन्मे इन बच्चों का वजन कम था. जन्म के 45 दिन बाद भी बच्चों का वजन 1.50 किलो के करीब हुआ था. बच्चों में रेटिना की बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच गयी थी, जिसके कारण आंखों की रोशनी तेजी से खत्म हो रही थी. आंख को बचाने के लिए एंटी वेजफ इंजेक्शन व लेजर से इलाज की अावश्यकता थी.
बच्चों का रिम्स में इलाज नहीं होने पर मारवाड़ी महिला समाजसेवी अनु पोद्दार ने ऑपरेशन में सहयोग का निर्णय लिया. उन्होंने अपने समाज की ओर से बच्चों के परिजन को 41 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी‍. इसके लिए कश्यप मेमोरियल आइ हॉस्पिटल की डॉ भारती कश्यप ने अनु पोद्दार की प्रसंशा की. उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रयास की जरूरत है. ऐसे बच्चों में 30 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं.
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मेच्योरिटी के लिए लेजर सुविधा उपलब्ध करायी गयी. इंट्रावट्रियिल इंजेक्शन की सुविधा भी योजना में नहीं है. जे शरण पैथोलैब द्वारा भी सभी बच्चों की मुफ्त खून जांच की गयी. छोटे बच्चों के एनेस्थेटिक डॉ विकाश कुमार गुप्ता व डॉ रवि धरमदसानी ने भी सहयोग किया.
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का सही तरीके से नहीं मिल रहा लाभ
राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के इलाज की सुविधा मुफ्त होनी है, लेकिन राज्य में इस योजना का लाभ सही से लाभुकाें को नहीं मिल रहा है. रेटिनोपैथी ऑफ प्री-मेच्योरिटी के एक आंख के लेजर से इजाज में 10,000 रुपये का निजी अस्पतालों को देने का प्रावधान है. फेको पद्धति से सर्जरी करने पर 20,000 रुपये का अनुदान मिलता है.
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