भाजपा : रांची, कोडरमा, खूंटी व गिरिडीह सीट पर बदले प्रत्याशी, चार हुए आउट, तीन की भूमिका पर सबकी नजर

रांची : भाजपा ने 14 लोकसभा सीटों के लिए अपने चार चेहरे बदल दिये है़ं चार सांसदों काे दाेबारा टिकट नहीं मिला है़ खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा और रांची के सांसद रामटहल चौधरी की टिकट उम्र को आधार बना कर काटी गयी है़ दोनों ही नेता 75 पार के फॉर्मूले में बाहर हुए है़ं […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 8, 2019 8:10 AM
रांची : भाजपा ने 14 लोकसभा सीटों के लिए अपने चार चेहरे बदल दिये है़ं चार सांसदों काे दाेबारा टिकट नहीं मिला है़ खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा और रांची के सांसद रामटहल चौधरी की टिकट उम्र को आधार बना कर काटी गयी है़ दोनों ही नेता 75 पार के फॉर्मूले में बाहर हुए है़ं
वहीं, गिरिडीह के सांसद रवींद्र पांडेय का टिकट आजसू के नाम पर काटा गया है़ यह सीट पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने आजसू को दे दी है़ कोडरमा के सांसद रवींद्र राय का टिकट राजद की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी के आने के बाद की परिस्थिति में चला गया़ रांची के मौजूदा सांसद रामटहल चौधरी बागी मूड में है़ं उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कह कर भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है़
दूसरी ओर कड़िया मुंडा ने दो टूक फैसला लिया, वह पार्टी के साथ है़ं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा व भाजपा प्रत्याशी को खूंटी में साथ देंगे़ वहीं रवींद्र पांडेय का मन डोल रहा है़
वह भी बागी मूड में ही है़ं आजसू को साथ देने की बात से इनकार कर रहे है़ं हालांकि लोकसभा प्रभारी मंगल पांडेय ने रवींद्र पांडेय को समझाया है़ गिरिडीह में आजसू के पक्ष में काम करते हुए पार्टी के प्रति निष्ठावान बने रहने की नसीहत दी. पर रवींद्र पांडेय अभी अपनी जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है़
इधर तमाम अटकलों के बावजूद कोडरमा के रवींद्र राय का खूंटा हिल गया़ सूचना के मुताबिक, उनकी परफॉरमेंस रिपोर्ट सही नहीं थी. रवींद्र राय ने अब तक अपनी नाराजगी का इजहार सार्वजनिक तौर पर नहीं किया है़
वह चुपचाप है़ रवींद्र राय की चुप्पी भी भाजपा के अंदरखाने की परेशानी है़ शनिवार को श्री राय ने फेसबुक पोस्ट में लिखा था : वर्ष 2014 में पार्टी ने एक मौका दिया था़ कोडरमा की जनता ने आशीर्वाद दिया था. पांच वर्ष सेवा की. इस बार जिन्हें मुझसे अधिक योग्य, सक्षम, समर्पित, निष्ठा समझ मौका दिया है, उन्हें मेरी बधाई़ नेतृत्व के प्रति अाभार. रवींद्र राय के इस पोस्ट से सब कुछ साफ है़
उन्होंने संयमित भाषा में कटाक्ष किया है़ रवींद्र राय अभी जमीन तलाशेंगे़ वह खुल कर सामने नहीं आनेवाले है़ं राजधनवार में उम्मीद बाकी है़ वह राजधनवार से विधानसभा चुनाव लड़ते रहे है़ं ऐसी परिस्थिति में उनके लिए विधानसभा आने का मौका है़
कड़िया मुंडा को छोड़ दिया जाये, तो भाजपा की राजनीति और रणनीति में इन तीन चेहरों की भूमिका पर सबकी नजर होगी़ अभी भाजपा के अंदरखाने राजनीतिक तपिश जरूर बढ़ी हुई है़

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