रांची : ब्रेक प्रेशर सर्टिफिकेट नहीं मिला, तो पायलट ने खड़ी कर दी ट्रेन, बाद में कर दी गयी रद्द

टाटा-हटिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर पर सवार 700 से ज्यादा यात्री हुए परेशान रांची : टाटा-हटिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर (58143/58161) गुरुवार को हटिया पहुंचने के बाद अचानक रद्द कर दी गयी. बीच रास्ते में ट्रेन के रद्द होने से ट्रेन पर सवार करीब 700 से ज्यादा यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. दरअसल, ट्रेन के पायलट को हटिया […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
टाटा-हटिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर पर सवार 700 से ज्यादा यात्री हुए परेशान
रांची : टाटा-हटिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर (58143/58161) गुरुवार को हटिया पहुंचने के बाद अचानक रद्द कर दी गयी. बीच रास्ते में ट्रेन के रद्द होने से ट्रेन पर सवार करीब 700 से ज्यादा यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. दरअसल, ट्रेन के पायलट को हटिया से आगे जाने के लिए ब्रेक प्रेशर सर्टिफिकेट (बीपीसी) नहीं मिला था, इसलिए उसने ट्रेन को आगे ले जाने से इनकार कर दिया.
जानकारी के अनुसार टाटा-हटिया पैसेंजर (58143) सुबह 11:40 बजे हटिया पहुंची. यहां से यह ट्रेन हटिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर (58161) के नाम से आगे जानेवाली थी. ट्रेन को लेकर जानेवाले पायलट ने स्टेशन मास्टर को सूचना दी कि उन्हें बीपीसी हटिया तक ही दिया गया है.
जब तक उन्हें झारसुगुड़ा तक का बीपीसी नहीं मिलेगा, वह ट्रेन को लेकर नहीं जायेंगे. इस मुद्दे पर काफी देर तक विवाद चलता रहा. इस दौरान रेलवे के कई अधिकारी भी हटिया रेलवे स्टेशन पहुंच गये थे. इस दौरान बानो, ओरगा, गोविंदपुर जानेवाले यात्री ट्रेन से उतर कर दूसरी ट्रेन में सवार हो गये. वहीं, विवाद का हल नहीं निकलने के बाद रेलवे के अधिकारियों को ट्रेन में बैठे यात्रियों को उतरने को कहा.
यात्री यह समझ नहीं पा रहे थे कि उन्हें ट्रेन से क्यों उतारा जा रहा है? इस दौरान कई यात्रियों की रेलवे के अधिकारियों से तू-तू, मैं-मैं भी हुई. दोपहर 2:00 बजे रेलवे की ओर से उदघोषणा की गयी कि ट्रेन को रद्द कर दिया गया है. बाद में ट्रेन को यार्ड में ले जाया गया, जहां उसकी साफ-सफाई व जांच की गयी और बीपीसी दिया गया. खाली ट्रेन रात 8:00 बजे झारसुगुड़ा के लिए रवाना हुई. शेष यात्रियों को एलेप्पी और तपस्विनी ट्रेन से आगे भेजा गया.
क्यों जरूरी होता है बीपीएस
ब्रेक प्रेशर सर्टिफिकेट (बीपीएस) किसी भी ट्रेन के लिए बेहद जरूरी होता है, जो ट्रेन के पायलट को कैरेज एंड वैगन डिपार्टमेंट की ओर से दिया जाता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि ट्रेन को रोकने के लिए उसमें कितना प्रेशर मौजूद है.
यह ट्रेन और उस पर सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. जब पायलट को बीपीएस दिया जाता है, तो वह कुछ दूर तक ट्रेन को चलाकर उसके प्रेशर की जांच भी करता है, ताकि यह पुष्ट हो जाये कि जो बीपीएस उसे मिला है, वह सही है भी या नहीं.
हटिया स्टेशन पर हमें ट्रेन से अचानक उतरने के लिए कहा गया. कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि कहां जायें और क्या करें. कोई सूचना भी नहीं दी गयी. रांची में कहीं रहने का ठिकाना भी नहीं है.
बाहलेन टोपनो
रांची मेरे लिए नयी जगह है. ट्रेन रद्द होने की सूचना तीन घंटे बाद दी गयी. कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आगे की यात्रा कैसे करें? यह रेलवे की लापरवाही है जिसका दंड यात्री भुगत रहे हैं.
सूरज कुमार
टाटा-हटिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर का ब्रेक प्रेशर सर्टिफिकेट (बीपीसी) हटिया तक ही था. इस कारण ट्रेन को रोका गया. रद्द करने के बाद लिए ट्रेन को यार्ड में ले जाया गया, जहां उसकी साफ-सफाई और जांच कर बीपीसी जारी िकया गया. खाली ट्रेन को रात 8:00 बजे झारसुगुड़ा को लिए रवाना किया गया.
नीरज कुमार, सीपीआरओ, रांची रेल मंडल
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