ओला का एनएचएम झारखंड के साथ होगा करार

रांची : स्वास्थ्य विभाग के तहत कार्यरत नेशनल हेल्थ मिशन सोसाइटी (एनएचएमएस) ने अपने इन व आउट स्टेशन टूर के लिए अॉनलाइन ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क कंपनी अोला के साथ करार करने का फैसला किया है. अोला के साथ एनएचएम पदाधिकारियों की शुरुआती वार्ता भी हो चुकी है. एनएचएम सूत्रों के अनुसार अोला ने इसे इस्ट इंडिया […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 31, 2019 2:12 AM

रांची : स्वास्थ्य विभाग के तहत कार्यरत नेशनल हेल्थ मिशन सोसाइटी (एनएचएमएस) ने अपने इन व आउट स्टेशन टूर के लिए अॉनलाइन ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क कंपनी अोला के साथ करार करने का फैसला किया है. अोला के साथ एनएचएम पदाधिकारियों की शुरुआती वार्ता भी हो चुकी है. एनएचएम सूत्रों के अनुसार अोला ने इसे इस्ट इंडिया का पहला कॉरपोरेट करार घोषित किया है.

दरअसल, एनएचएम के कार्यक्रमों की समीक्षा व इससे संबंधित बैठकों में भाग लेने के लिए दिल्ली व अन्य शहरों से आनेवाले विशेषज्ञ, विभिन्न कार्यक्रम पदाधिकारियों तथा हेल्थ एजेंसी के लोगों को फील्ड विजिट पर जाने की जरूरत होती है. इसके साथ ही राजधानी में स्वास्थ्य विभाग तथा इसके विभिन्न कार्यालयों की बैठकों में इन्हें शामिल होना होता है. एनएचएम सूत्रों के अनुसार इसकी अपनी ज्यादातर गाड़ियां अच्छी स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में किराये की गाड़ियों से काम चलाया जा रहा है. पर इसमें पारदर्शिता की कमी सहित अन्य परेशानियां हैं.
पूरी यात्रा की मॉनिटरिंग भी कठिन है. अब अोला की गाड़ियों में ऐप आधारित सुविधा होने से पारदर्शिता बढ़ेगी. वहीं पदाधिकारियों व कंसलटेंसी के कद व उनके लिए तय मानक के आधार पर अलग-अलग तरह की (सेडान, हैचबैक तथा स्मॉल, मीडियम व लार्ज) कार सुविधाजनक तरीके से हायर की जा सकेगी. अभी जरूरत व अर्हता के आधार पर विभिन्न पदाधिकारियों के नाम व उनके मोबाइल नंबर रजिस्टर किये जा रहे हैं. यात्रा से पहले ऐसे लोगों को एनएचएम के सक्षम पदाधिकारी से सहमति लेनी होगी.इसके बाद ये अोला बुक कर सकते हैं. यात्रा का खर्च एनएचएम के खाते से अपने-आप कट जायेगा.
बढ़ेगी फील्ड विजिट की संख्या
केंद्र सरकार के नये निर्देश व फॉरमेट के कारण अब फील्ड विजिट की संख्या बढ़ेगी. दरअसल केंद्र ने संविदा पर कार्यरत कंसलटेंट स्तर के पदाधिकारियों के वार्षिक अप्रेजल में यात्रा की संख्या का भी एक कॉलम बनाया है. यानी अप्रेजल के दौरान यह भी देखा जायेगा कि संबंधित कंसलटेंट ने कितना फील्ड विजिट किया है या ज्यादातर मुख्यालय में ही रहा है. यानी अब सभी कंसलटेंट को तय मानक के अनुसार फील्ड विजिट करना होगा.

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