कई बीमारियों में अचूक दवा है मिट्टी, पुरातन काल से भारत में लोकप्रिय है मृत्तिका चिकित्सा

रांची : ब्रह्मांड का निर्माण पंचतत्व से हुआ है. हमारा शरीर भी एक ब्रह्मांड ही है, जो पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से ही बना है. पृथ्वी तत्व हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है. शरीर के निर्माण, पालन–पोषण, वृद्धि और विकास के लिए मिट्टी अत्यन्त आवश्यक तत्व है. यह कहना है डॉ […]

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रांची : ब्रह्मांड का निर्माण पंचतत्व से हुआ है. हमारा शरीर भी एक ब्रह्मांड ही है, जो पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से ही बना है. पृथ्वी तत्व हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है. शरीर के निर्माण, पालन–पोषण, वृद्धि और विकास के लिए मिट्टी अत्यन्त आवश्यक तत्व है.

यह कहना है डॉ नीरज नयन ऋषि का. रांची स्थित राज्य योग केंद्र में संचालित नेचुरोपैथ चिकित्सा केंद्र के प्रमुख डॉ नीरज कहते हैं कि सभी तरह के पौष्टिक आहार पेड़–पौधों, वनस्पतियों और विभिन्न प्रकार के खाद्यान्नों से मिलते हैं. ये सभी चीजें पृथ्वी (मिट्टी) से मिलती हैं. हमारे शरीर की मांसपेशियां, हड्डियां और चर्म इसी पृथ्वी तत्व से बने हैं. अत: स्वस्थ रहना है, तो पृथ्वी (मिट्टी) तत्व के संपर्क में रहना बेहद जरूरी है. पृथ्वी तत्व से चिकित्सा की प्रक्रिया को मृत्तिका चिकित्सा या मिट्टी चिकित्सा कहते हैं.

डॉ नीरज के मुताबिक, पुरातन काल से ही मिट्टी चिकित्सा का भरपूर उपयोग हुआ है. जैसे–मिट्टी से स्नान, मिट्टी के घर में रहना, मिट्टी से हाथों, पैरों और शरीर की सफाई, पृथ्वी पर सोना, पृथ्वी पर नंगे पैर चलना, चिकित्सा का ही एक रूप है.

उन्होंने बताया कि मृत्तिका चिकित्सा का वर्णन वेद और उपनिषद् में भी है. इस चिकित्सा का विकास हमारे ऋषि–मुनियों ने किया. एडोल्फ जस्ट की पुस्तक ‘रिटर्न टू नेचर’ और हेनरी लिंडर की पुस्तक ‘प्रैक्टिस एंड फिलॉसफी ऑफ नेचर क्योर’ में मिट्टी चिकित्सा का वर्णन है.

श्री ऋषि ने बताया कि चिकित्सा में मिट्टी का उपयोग दो प्रकार से किया जाता है. स्थानीय मिट्टी की पट्टी और संपूर्ण मिट्टी लेप. स्थानीय मिट्टी की पट्टी का इस्तेमाल प्राय: पेट और माथे पर किया जाता है. जरूरत पड़ने पर शरीर के विभिन्न भागों में इसका इस्तेमाल करते हैं. संपूर्ण मिट्टी के लेप में पूरे शरीर में मिट्टी का लेप एक साथ लगाकर 20–40 मिनट तक धूप में सूख जाने तक रखा जाता है. अंत में स्नान कराया जाता है.

डॉ ऋषि के मुताबिक, मिट्टी चिकित्सा से हमारे शरीर के तापमान में कमी आती है. इससे शरीर का ताप नियंत्रित रहता है. फलस्वरूप मोटापा में कमी आती है. इसकी वजह से हमारे शरीर में शीतलता आती है, जिससे उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है.

उन्होंने कहा कि पेट पर मिट्टी की पट्टी लगाने से मिट्टी पेट के उस स्थान के ताप को अवशोषित कर लेती है एवं दूषित पदार्थ को बाहर निकाल देती है. इससे कब्ज, एसिडिटी, यकृत की समस्या का निदान होता है. इसी तरह आंख पर मिट्टी की पट्टी लगाने से आंखें शीतल होती हैं. इससे सिरदर्द , तनाव एवं नेत्र समस्या का निदान होता है.

कैसी मिट्टी से करें इलाज

इलाज के लिए उपयोग में लायी जाने वाली मिट्टी, कंकड़-पत्थर से मुक्त, मिलावट मुक्त, रासायनिक खाद से मुक्त होनी चाहिए. मिट्टी साफ–सुथरी जमीन के 3–4 फीट नीचे की होनी चाहिए. प्रयोग में लाने से पूर्व इससे कंकड़-पत्थर निकाल कर साफ करके धूप में पूरी तरह से सुखा लेना चाहिए.

मिट्टी चिकित्सा अत्यंत सरल एवं प्रभावकारी है. इसका प्रयोग घर पर आसानी से किया जा सकता है. इस चिकित्सा का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. हां, एक बात का ध्यान रहे कि मिट्टी चिकित्सा करते समय चिकित्सक से सलाह अवश्य ले लें.

(डॉ नीरज नयन ऋषि स्टेट योगा सेंटर के वेलनेस सेंटर के प्रमुख हैं.)

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