रांची : आरोपी इंजीनियर जुडको में निबटा रहा है करोड़ों का टेंडर

शकील अख्तर नगर विकास विभाग ने कांट्रैक्ट पर नियुक्त करने के लिए नियम तक तोड़ दिया था रांची : घर बैठे बने डीपीआर का तकनीकी स्वीकृति देने का आरोपी इंजीनियर राजीव कुमार वासुदेव अब झारखंड अरबन इंफ्रा स्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी(जुडको) में करोड़ों का टेंडर निबटा रहा है. उसे प्रोजेक्ट डायरेक्टर टेक्निकल का अतिरिक्त प्रभार भी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
शकील अख्तर
नगर विकास विभाग ने कांट्रैक्ट पर नियुक्त करने के लिए नियम तक तोड़ दिया था
रांची : घर बैठे बने डीपीआर का तकनीकी स्वीकृति देने का आरोपी इंजीनियर राजीव कुमार वासुदेव अब झारखंड अरबन इंफ्रा स्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी(जुडको) में करोड़ों का टेंडर निबटा रहा है. उसे प्रोजेक्ट डायरेक्टर टेक्निकल का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया है. रिटायरमेंट के बाद नगर विकास विभाग ने इस इंजीनियर को कांट्रैक्ट पर जुडको में मुख्य अभियंता के पद पर नियुक्त करने के लिए नियम तोड़ा था.
विभागीय मंत्री सीपी सिंह ने इस इंजीनियर की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताया था. लेकिन वह भी इसकी नियुक्ति रोकने में सफल नहीं हो सके. जानकारी के मुताबिक बिना स्थल निरीक्षण के ही बनाये गये डीपीआर पर तकनीकी स्वीकृति देने के आरोपी इंजीनियर को रिटायरमेंट के बाद नगर विकास विभाग ने जुडको में मुख्य अभियंता के पद पर नियुक्त किया था. जुलाई 2017 में इस इंजीनियर को कांट्रैक्ट के आधार पर तीन साल के लिए नियुक्त किया गया.
जबकि राज्य में एक ही साल के लिए किसी को कांट्रैक्ट के आधार पर नियुक्त करने का प्रावधान है. 26 अप्रैल 2016 को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला किया गया था कि कांट्रैक्ट के आधार पर एक साल के लिए नियुक्ति होगी. कांट्रैक्ट पर नियुक्त कर्मचारी का काम संतोषप्रद होने के बाद एक-एक साल के लिए कांट्रैक्ट की अवधि बढ़ायी जायेगी.
कैबिनेट के इस फैसले के आलोक में तत्कालीन योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित खरे के हस्ताक्षर से इससे संबंधित संकल्प जारी किया गया. लेकिन नगर विकास विभाग ने इस इंजीनियर को कांट्रैक्ट के आधार पर तीन साल के लिए नियुक्त किया. इससे जुड़े मामले में विभागीय मंत्री सीपी सिंह ने नियुक्ति को सरकार के संकल्प के विरुद्ध करार दिया. फिर भी विभाग ने इस इंजीनियर को तीन साल के लिए नियुक्त कर लिया.
इस पूरे प्रकरण में जब घर बैठे बनाये गये डीपीआर पर तकनीकी स्वीकृति देने के मामले ने जोर पकड़ा तो कार्रवाई करने के बदले जांच रिपोर्ट की समीक्षा के लिए नगर विकास विभाग के विशेष सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बना दी गयी. समिति की के गठन के लिए सात मार्च 2019 को आदेश जारी किया गया. समिति काे 11 मार्च 2019 तक जांच रिपोर्ट की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देनी थी. लेकिन चार माह बाद भी समिति ने जांच रिपोर्ट की समीक्षा कर रिपोर्ट नहीं सौंपी है.
क्या है विभागीय जांच रिपोर्ट में : खूंटी जिले में दतिया-बेलाहाथी पीपल चौक तक 1.54 किलोमीटर की सड़क योजना में गड़बड़ी की शिकायत की जांच करायी गयी. जिसमें पाया गया कि सड़क की इस योजना का डीपीआर बनाने का काम दिल्ली की कंपनी एमएनवी डिजाइन कंसल्टेंट को दिया गया था. इस कंपनी ने इस योजना की लागत 1.82 करोड़ रुपये आंकी थी.
जांच में पाया गया कि दतिया चौक से बेलाहाथी तक 200 फुट लंबी और नौ फुट चौड़ी सड़क पहले से बनी हुई थी. इसके आगे दीवार थी. सड़क की स्थिति अच्छी थी.इसके बावजूद सड़क बनाने के लिए डीपीआर बनाया गया था. इसमेंं पांच किलोमीटर दूसर से मिट्टी काट कर लाने और गड्ढा भरने, मोरम का सब बेस तैयार करने, ग्रेड-टू व ग्रेड-थ्री सहित बाकी सभी प्रावधान किये गये थे.
यानी कंसल्टेंट ने डीपीआर बनाने के लिए स्थल का निरीक्षण ही नहीं किया था. नगर विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता राजीव कुमार वासुदेव ने बिना स्थल निरीक्षण के बने डीपीआर की तकनीकी स्वीकृति दी थी. जांच समिति ने इस पूरे प्रकरण में मुख्य अभियंता, कंसल्टेंट सहित अन्य को दोषी माना था.
साथ की कंसल्टेंट और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की अनुशंसा की थी. लेकिन कंसल्टेंट अब भी नगर विकास विभाग में काम कर रहा है. बिना स्थल निरीक्षण के बने डीपीआर पर तकनीकी स्वीकृति देनेवाले इंजीनियर रिटायरमेंट के बाद जुडको में मुख्य अभियंता के पद पर नियुक्त हो गये हैं.
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