जल है तो कल है : खाली कोयला खदान का पानी होता है बर्बाद

रांची : जल संरक्षण की दिशा में सरकार ध्यान दे रही है लेकिन अब भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. शहर से लेकर गांवों तक पानी बचाने की दिशा में काम हो रहा है. बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की तरफ भी ध्यान देना होगा.... अक्सर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 9, 2019 12:36 PM

रांची : जल संरक्षण की दिशा में सरकार ध्यान दे रही है लेकिन अब भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. शहर से लेकर गांवों तक पानी बचाने की दिशा में काम हो रहा है. बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की तरफ भी ध्यान देना होगा.

अक्सर हमारे किचन और बाथरूम का पानी यूं ही बर्बाद हो जाता है. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को फिल्टर कर किचन गार्डेन, कार वाशिंग एवं बाथरुम फ्लशिंग समेत अन्य कार्यों में उपयोग किया जा सकता है. पानी को रिसाइकिल करना बेहद जरूरी है. झारखंड में 5.99 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है. गुमला जिले में सर्वाधिक और कोडरमा में सबसे कम भूगर्भ जल है.

खाली कोयला खदानों की पानी का भी इस्तेमाल संभव
झारखंड के चार जिले बोकारो (बेरमो, चंद्रपुरा), धनबाद (बाघमारा,धनबाद, झरिया), रामगढ़ (रामगढ़, पतरातू. मांडू) और रांची (खलारी) की कोयला खदानों से कोयले के लिए बड़ी मात्रा में पानी निकाले जा रहे हैं. इन्हें यूं ही बर्बाद कर दिया जाता है. खाली कोयला खदानों में काफी पानी है, जो उचित संरक्षण के अभाव में कई बीमारियों को दावत दे रहा है. बेहतर जल प्रबंधन किया जाये, तो पेयजल के साथ-साथ कृषि कार्यों में भी इसका पानी कारगर साबित होगा.
12 जिलों का पानी है मीठा जहर
राज्य में 12 जिलों के कुछ प्रखंड का पानी मीठा जहर यानी फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. साहिबगंज जिले के साहिबगंज, राजमहल व उधवा ब्लॉक के कुछ इलाके के पानी में गंगा नदी के कारण आर्सेनिक है.
फ्लोराइड प्रभावित जिले और प्रखंड
जिला प्रखंड
बोकारो चास, चंदन कियारी व पेटरवार
धनबाद झरिया व बलियापुर
गढ़वा गढ़वा, नगर उंटारी, रंका, रमकंडा, चिनिया, मेराल, डंडई, कांडी, मझिआंव, भंडरिया, भवनाथपुर, धुरकी व रमना
गिरिडीह गिरिडीह, खिजिरी व तिसरी
गोड्डा गोड्डा, बोरजोरी, पथरगामा, महगामा व परजाहाट
गुमला चैनपुर, गुमला, सिसई, घाघरा, बिशुनपुर व डुमरी
कोडरमा कोडरमा, सतगावां, चंदवारा, जयनगर व मरकच्चो
पाकुड़ पकुड़िया, अमरापाड़ा व लिट्टीपाड़ा
पलामू विश्रामपुर, चैनपुर, मेदिनीनगर (डाल्टनगंज), सतबरवा, छतरपुर, मनातू, जपला, लेस्लीगंज, पांकी, पाटन, पांडू व हरिहरगंज
रांची ओरमांझी, सिल्ली व नामकुम
साहिबगंज साहिबगंज, बरहेट, बोरियो व राजमहल
खूंटी मुरहू, कर्रा व तोरपा
2022 तक हर घर तक पहुंचेगा शुद्ध पानी
राज्य में हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचे, इसके लिए राज्य सरकार प्रयासरत है. पहले 12 फीसदी लोगों के घरों में पेयजल पहुंचता था. अब 32 फीसदी को मिल रहा है. वर्ष 2020 तक 50 फीसदी और 2022 तक शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है.
रोजाना प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी की जरूरत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड के मुताबिक राज्य में प्रति व्यक्ति रोजाना 55 लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन विभिन्न स्रोतों से प्रति व्यक्ति रोजाना 40 लीटर पानी उपलब्ध हो पा रहा है.