जज कॉलोनी के मल्टीपरपस हाॅल में साइबर अपराध को लेकर सेमिनार,
रांची : साइबर अपराध जामताड़ा, देवघर, दुमका जिलों के आसपास तक ही सीमित नहीं रहा. राजधानी समेत अन्य जिले भी इसकी चपेट में अा गये हैं.
आज हम डिजिटल युग की ओर बढ़ रहे हैं. वैसी स्थिति में लोगों को डिजिटल रूप से जागरूक करने की जरूरत है. कानूनी जागरूकता फैलानेवाली संस्थाओं को अपने प्रोग्राम में डिजिटल जागरूकता को भी जोड़ना चाहिए. उक्त बातें झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने कही. वे शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि कांके रोड स्थित जज कॉलोनी बहुद्देशीय सभागार में साइबर अपराध पर कानूनी जागरूकता को लेकर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार(डालसा) की अोर से न्यायिक अकादमी के संयुक्त प्रयास से किया गया था.
जस्टिस श्री सिंह ने कहा कि बैंक व पुलिस को समय के साथ अप-टू-डेट करना होगा. यह जागरूकता कार्यक्रम एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है. 19 फरवरी से रिसर्च प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है. इसकी समीक्षा रिपोर्ट अक्टूबर तक भेजी जायेगी. इसके बाद जमशेदपुर में अगला जागरूकता कार्यक्रम होगा़ जस्टिस श्री सिंह ने कहा कि अगले 25 सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे ऊपर हावी हो जायेगा. हमें लिलिपुटीयंस की तरह ट्रीट करेगा. प्रभावशाली बनाने के लिए मानव संसाधन जैसे बैंकिंग, पुलिस, संचार विभाग की जरूरत है.
एसएसपी अनीश गुप्ता ने साइबर अपराध के विषय में कहा कि अपराधी लोगों को ठगने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. वर्तमान में ओएलएक्स फर्जीवाड़ा सामने आया है. राजधानी में साइबर अपराध की घटना में बढ़ोतरी हो रही है. गूगल पर सर्च के दौरान भी साइबर अपराधी कस्टमर आइडी को ट्रैप करता है. वहीं एसबीआइ के एजीएम सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि बैंक साइबर अपराधियों का आसान लक्ष्य होता है.
एटीएम से पैसे निकालने के वक्त परेशानी होती है, तो बैंक से ही मदद लें. एटीएम गार्ड से सहायता नहीं लेने की सलाह दी. कार्यक्रक का संचालन डालसा सचिव फहीम किरमानी व न्यायिक दंडाधिकारी अनामिका गौतम ने संयुक्त रूप से किया. मौके पर जस्टिस राजेश कुमार, आइजी नवीन सिंह, एनजीओ रक्षा के विनित कुमार, एनपीसीआइ के उपाध्यक्ष भरत पंचाल, न्यायिक पदाधिकारी, पुलिस अधिकारी, एपीपी, अधिवक्ता सहित विभिन्न संस्थाअों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
बैंक अधिकािरयों को एटीएम की नियमित जांच करनी चाहिए : जस्टिस प्रसाद
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि सुदूरवर्ती जगहों से साइबर अपराध किये जा रहे हैं, जहां पहुंचना कठिन होता है. एटीएम की नियमित जांच बैंक के अधिकारियों को करनी चाहिए. बैंक व पुलिस के बीच समन्वय बनाया जाना चाहिए. समन्वय नहीं होने की के कारण अपराधी छूट जाते हैं. पुलिस समय पर साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करती है.
कहीं टेक्नोलॉजी का दास न बन कर रह जाये इंसान : जस्टिस एबी सिंह
जस्टिस अनंत बिजय सिंह ने साइबर अपराध के मनोवैज्ञानिक प्रभाव के विषय में बताया. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का अत्यंत विकास डर भी पैदा करता है. ऐसा लगता है कि अगले कुछ वर्षों में इंसान टेक्नोलॉजी का दास बन कर रह जायेगा. टेक्नोलॉजी विकास मानव सभ्यता की चौथी क्रांति की तरह है. इस सदी में दुनिया की प्रमुख शक्तियों में होड़ लगी है कि कौन टेक्नोलॉजी को काबू करेगा.